यूपी उपचुनाव नतीजे - बीजेपी को मिली संजीवनी....एसपी की बढ़ी बैचेनी

देश के आठ राज्यों की 12 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं....उत्तर प्रदेश विधानसभा की तीन सीट मुजफ्फरनगर, देवबंद और फैजाबाद इनमें शुमार...

यूपी उपचुनाव नतीजे - बीजेपी को मिली संजीवनी....एसपी की बढ़ी बैचेनी

BJP-VS-SP-IN-UP-BIG

देश के आठ राज्यों की 12 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं....उत्तर प्रदेश विधानसभा की तीन सीट मुजफ्फरनगर, देवबंद और फैजाबाद इनमें शुमार थीं....राजनीतिक तौर पर ये तीनों सीटें समाजवादी पार्टी के लिए बेहद मायने रख रही थीं...क्योंकि तीनों सीटों पर नतीजों से पहले तक समाजवादी पार्टी का ही अधिकार था....सीधे सपाट शब्दों में कहा जा सकता है कि ये तीनों सीटें मुलायम सिंह औऱ उनकी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय थीं....लेकिन उपचुनाव के नतीजों ने ना केवल राजनीतिक विश्लेषकों को चौंकाया बल्कि समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका दिया है...तीन में से दो सीट देवबंद और मुज़फ्फरनगर को समाजवादी पार्टी गंवा बैठी...देवबंद की सीट जहां कांग्रेस पार्टी के खाते में गई वहीं मुजफ्फरनगर की सीट को बीजेपी ने एसपी से छीन लिया।

कुछ राहत फैजाबाद की बीकापुर सीट पर समाजवादी पार्टी को महसूस हो रही होगी....यहां एसपी उम्मीदवार ने जैसे-तैसे अपनी सीट को बचाए रखा....और तो और मुलायम और उनके समधी लालू यादव की पार्टी आरजेडी दूसरे स्थान पर क़ाबिज़ रही.....रामजी की नगरी में हालांकि बीजेपी को कोई ख़ास सफलता नहीं मिल सकी और वो चौथे पायदान पर ही रही।

लेकिन सबसे ज़्यादा आश्चर्य मुजफ्फरनगर सीट के नतीजे को देखकर हो रहा है....पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ये महत्वपूर्ण ज़िला पिछले कई समय से दंगों की आंच पर बैठा है....और ऐसे में इस उपचुनाव में एसपी की हार.....एक बड़ा सियासी उलटफेर करती दिखाई दे रही है....वहीं बीजेपी को इसी सीट पर मिली जीत ने ज़ाहिर है ऊर्जा से लबरेज़ कर दिया होगा....कहा जा रहा है कि इस सीट को हासिल करने के लिए सांसद संजीव बालियान ने जाट वोट को लपकने के लिए तो एडी-चोटी का ज़ोर लगा दिया...और अपने उम्मीदवार के चुनाव-प्रचार अभियान में दंगे औऱ आंगवाडी वर्कर रेप को मुख्य मुद्दा बनाकर मुज़फ्फरनगर सीट बीजेपी की झोली में डलवा दी।

.तो ज़ाहिर है ये जीत.....एक तरीक़े से संजीवनी का काम करेगी यूपी में अपने वजूद को खोजती बीजेपी के लिए.....और हो सकता है मुज़फ्फरनगर जीत की संजीवनी उत्तर प्रदेश में अगली साल होने वाले विधानसभा चुनाव तक पार्टी को लड़ने लायक़ बना पाए।

वहीं सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी की जीत का जश्न धरा का धरा रह गया...पार्टी को उम्मीद ही नहीं बल्कि यक़ीन था कि वो इन तीनों सीटों को बचाए रखेगी....लेकिन नतीजों से पहले तक अपने पास रही तीन सीटों में से दो को गंवा बैठी मुलायम की पार्टी...ये संकेत समाजवादी पार्टी के लिए अच्छे तो नहीं है...कहां तो यूपी की अखिलेश सरकार...राज्य के सभी वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास की दुहाई देती नहीं थकती...लेकिन विपक्ष तो विपक्ष ठहरा...क़ानून-व्यवस्था, रोज़गार, किसान - दलित और मुस्लिम....इस तरह के कई मुद्दे रुपी तीर हैं विपक्ष के तरकश में.....जिनका समाजवादी सरकार को मुक़ाबला करना है......और साथ ही ये भी समय रहते सुनिश्चित करना होगा कि पार्टी के साथ कौन सा सहयोगी दल...यूपी के चुनावी समर में कूदने का भागीदार बनेगा....ताक़ि बाहरी हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाए.....ख़ैर ये तो भविष्य की गर्त में छिपा है कि कौन मुलायम का साथ मुश्किल घड़ी में देता है।

इसके अलावा पहलू एक ये भी है कि समाजवादी पार्टी को अंदरखाने हमले....शायद ज़्यादा आघात पहुंचा रहे हैं...और इसके संकेत अनेको बार मुलायम ज़ाहिर कर चुके हैं पार्टी फोरम पर....लेकिन लगता है मुलायम की ये चिंता....पार्टी की चिंता बन नहीं पा रही....जिसकी जीती-जागती मिसाल दे गया है...हालिया उपचुनाव।