अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद कालिखो पुल बने मुख्यमंत्री

अरुणाचल प्रदेश से राष्ट्रपति शासन हटाने की केंद्र की सिफारिश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को स्वीकार कर लिया जिसके कुछ घंटों बाद ही...

अरुणाचल में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद कालिखो पुल बने मुख्यमंत्री

kalikho pulअरुणाचल प्रदेश से राष्ट्रपति शासन हटाने की केंद्र की सिफारिश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को स्वीकार कर लिया जिसके कुछ घंटों बाद ही कांग्रेस के बागी नेता कोलिखो पुल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल जेपी राजखोवा ने उन्हें शपथ दिलाई।

ज्ञात हो कि कोलिखो पुल वर्ष 2003-07 में गेगोंग अपांग की सरकार में वित्त मंत्री थे। 19 असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों के नेता कोलिखो पुल ने भाजपा के 11 और दो निर्दलीयों के समर्थन का दावा करते हुए सरकार बनाने के लिए बुधवार को राज्यपाल जेपी राजखोवा के समक्ष दावा पेश किया था। इसके बाद राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति से राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की थी। राज्य में 26 जनवरी को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। 60 सदस्यीय विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता नबाम तुकी के साथ 26 कांग्रेस विधायक हैं।

कांग्रेस ने राज्य में संवैधानिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट का इस मसले पर आदेश वापस लेने से पार्टी को कोशिश बेकार हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य की विधानसभा में बहुमत साबित का मौका देने के लिए अंतरिम आदेश पारित करने की कांग्रेस की मांग खारिज कर दी। अरुणाचल के कांग्रेस नेताओं की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पार्टी को राज्य में बहुमत हासिल है और विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए निर्देश जारी किया जाए।अदालत ने इन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि कोई भी आदेश बहस पूरी होने के बाद दिया जाएगा। इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन के अधीन चल रहे अरुणाचल प्रदेश में यथास्थिति बरकरार रखने का अपना आदेश भी रद्द कर दिया था।

अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक संकट गहराने के बाद राज्य में राष्टपति शासन लगा दिया गया था। राष्ट्रपति शासन की सिफारिश के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट में अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। उसकी संविधान पीठ राज्यपाल के संवैधानिक शक्तियों के दायरे को लेकर उठे सवालों पर भी सुनवाई कर रही है। अदालत राज्य के स्पीकर द्वारा 14 विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले पर भी विचार कर रही है।