संसद में आर्थिक सर्वे पेश, अगले दो वर्षों में विकास दर आठ प्रतिशत रहने का अनुमान

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली नेआज संसद में आर्थिक सर्वे पेश करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था विकास के पथ पर तेजी से कदम बढ़ा रही है, क्‍योंकि...

संसद में आर्थिक सर्वे पेश, अगले दो वर्षों में विकास दर आठ प्रतिशत रहने का अनुमान



arun-jaitley वित्‍त मंत्री अरुण जेटली नेआज संसद में आर्थिक सर्वे पेश करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था विकास के पथ पर तेजी से कदम बढ़ा रही है, क्‍योंकि महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार, राजकोषीय मोर्चे पर विवेकपूर्ण कदमों और मूल्‍य स्थिरता पर ध्‍यान केन्द्रित करने की बदौलत वृहत-संवेदनशीलता कम हो गई है। उन्होंने कहा कि कीमतों के मोर्चे पर नरमी की स्थिति और देश में बाह्य चालू खाते के संतोषजनक स्‍तर को देखते हुए अगले दो वर्षों में 8 प्रतिशत या उससे भी ज्‍यादा की विकास दर हासिल करना अब संभव नजर आ रहा है।

इस दौरान जेटली ने कहा कि सरकार सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह के तीव्र विकास के लिए जो मौजूदा स्थितियां हैं, उनमें वृहत-आर्थिक स्थिरता सहायक साबित हो रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक समीक्षा में वर्ष 2016-17 के दौरान आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत से लेकर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2014-15 में 7.2 प्रतिशत और वर्ष 2015-16 में 7.6 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर हासिल करने के बाद सात प्रतिशत से ज्‍यादा की विकास दर ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से विकास करने वाली प्रमुख अर्थव्‍यवस्‍था में तब्‍दील कर दिया है। इस समीक्षा में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में भारत का योगदान अब और अधिक मूल्‍यवान हो गया है, क्‍योंकि चीन फिलहाल अपने को फिर से संतुलित करने में जुटा हुआ है। जेटली ने इस दौरान कहा कि भारत में विकास के मोर्चे पर जो तेजी देखी जा रही है, वह मुख्‍यत: उत्पादन की खपत के चलते ही संभव हो रही है। इसमें कहा गया है कि जहां एक ओर सेवा क्षेत्र के विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई, वहीं विनिर्माण क्षेत्र में आई तेजी ने लगातार दो वर्षों से मानसून के कमजोर रहने के चलते कृषि क्षेत्र में दर्ज की गई निम्‍न विकास दर की भरपाई कर दी है।

उधर आर्थिक समीक्षा में कमजोर वैश्विक मांग के प्रति आगाह किया गया है। आर्थिक समीक्षा 2015-16 में कहा गया है कि चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद ज्‍यादा पूंजीगत खर्च, राज्‍यों को ज्‍यादा शुद्ध संसाधन हस्‍तांतरण और ज्‍यादा सकल कर राजस्‍व के बीच संतुलन कायम करने प्रयास किया जा रहा है।