सियाचीन से सेना नहीं हटेगी- मनोहर पर्रिकर

सियाचिन में हाल ही में आए बर्फीले तूफान में अपने दस सैनिकों को खोने के बावजूद भारत ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर में स्थित इस दुर्गम बर्फीले क्षेत्र से...

सियाचीन से सेना नहीं हटेगी- मनोहर पर्रिकर

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सियाचिन में हाल ही में आए बर्फीले तूफान में अपने दस सैनिकों को खोने के बावजूद भारत ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर में स्थित इस दुर्गम बर्फीले क्षेत्र से अपने सैनिकों को हटाने से इंकार कर दिया और कहा कि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता जो भारत द्वारा इस रणनीतिक क्षेत्र को खाली करने की स्थिति में इसे हथिया सकता है।

संसद में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि सियाचीन से भारतीय सेना को हटा देना भारत के लिए ख़तरे का सबब बन सकता है......लोकसभा में कुछ सांसदों के पूरक प्रश्नों के जवाब में रक्षा मंत्री ने कहा कि सियाचिन को खाली करने पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पर्रिकर ने कहा, ‘‘अगर हम सियाचिन खाली करते हैं तब दुश्मन उन मोर्चों पर कब्जा कर सकता है और वे तब सामरिक रूप से लाभ की स्थिति में आ जाएंगे। और तब हमें अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा। हमारे समक्ष 1984 का अनुभव है।’’

उन्होंने कहा कि 'हम जानते हैं कि हमें कीमत चुकानी पड़ेगी और हम अपने सशस्त्र बलों के जवानों को सलाम करते हैं लेकिन हम इस मोर्चे पर डटे रहेंगे, हमें इस सामरिक मोर्चे पर जवानों को तैनात रखना है। यह सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बिन्दु है।'

दरअस्ल रक्षा मंत्री सियाचिन में हाल ही में आए बर्फीले तूफान में अपने दस सैनिकों को खोने की पृष्ठभूमि में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे.....पर्रिकर ने कहा, ‘‘मैं नहीं समझता कि इस सदन में किसी को भी पाकिस्तान की बातों पर एतबार होगा.....अगर हम वहां से हटते हैं तो दुश्मन उस पर कब्जा कर सकता है, उसे हथिया सकता है और उन्हें रणनीतिक लाभ होगा।

आपको बता दें कि भारत के कब्जे में सियाचिन ग्लेशियर का सर्वोच्च स्थल साल्टोरो दर्रा है जो 23 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है।

हाल ही में सियाचिन में 3 फरवरी को सेना की एक अग्रिम चौकी हिम स्खलन की चपेट में आ गई जिससे एक जेसीओ समेत 10 सैनिक जिंदा बर्फ में दब गए थे..... छह दिन बाद इनमें से एक जवान जीवित पाया गया लेकिन कुछ ही दिन बाद उसने दम तोड़ दिया।

इसके बाद सदन में के सी त्यागी ने सरकार के समक्ष ये मांग उठाई कि इस मुद्दे पर सरकार को पाकिस्तान के साथ वार्ता कर यहां से दोनों पक्षों की सेना को हटवाने का प्रयास करना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले 32 वर्षों में सियाचिन में 915 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सियाचिन ग्लेशियर में सेवारत सैनिकों को सतत चिकित्सा सुविधा मुहैया करायी जाती है जो सामान्य चिकित्सा सुविधा से छह गुणा अधिक है...इस इलाक़े में सैनिकों की तैनाती में काफी खर्चा होता है...मसलन 2 रुपए की रोटी पहुचांने कि लिए 200 रुपए खर्च करने पड़ते हैं...और ज़रुरी साज़ो-सामान को दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है।