विनोद राय बैंक ब्यूरो बोर्ड के पहले अध्यक्ष

केन्द्र सरकार ने पूर्व सीएजी विनोद राय को नवगठित बैंक बोर्ड ब्‍यूरो का अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया है।इस ब्यूरो का काम बैंको में शीर्ष स्‍तर पर...

विनोद राय बैंक ब्यूरो बोर्ड के पहले अध्यक्ष

Vinod_Rai_CAG

केन्द्र सरकार ने पूर्व सीएजी विनोद राय को नवगठित बैंक बोर्ड ब्‍यूरो का अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया है।

इस ब्यूरो का काम बैंको में शीर्ष स्‍तर पर नियुक्तियां करना,बैंको के विलय,धनराशि जुटाने के संबंध में परामर्श देना होगा।

नवगठित बैंक बोर्ड ब्यूरो के अध्यक्ष विनोद राय की नियुक्ति दो साल के लिए की गई है....वहीं इस पद से पहले विनोद राय ने कैग के कार्यकाल में यूपीए के शासन के दौरान कई मंत्रालयों में हुए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया था....पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने बैंक बोर्ड ब्‍यूरो के अध्‍यक्ष पद पर राय के नाम की मुहर लगाई है।

राय के अलावा इस ब्‍यूरो में आईसीआईसीआई के पूर्व संयुक्‍त प्रबंध निदेशक एच एन सिनोर बैंक ऑफ बड़ौदा के पूर्व सीएमडी अनिल खंडेलवाल और रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के पूर्व प्रमुख रुप कुडवा बतौर सदस्‍य शामिल होंगे।

दरअस्ल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सबसे बड़ी समस्‍या इस समय फंसे कर्ज की है..... वहीं मोदी सरकार ने बैंक बोर्ड ब्‍यूरो का गठन ऐसे समय किया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको के फंसे कर्ज की राशि लगभग चार लाख करोड़ रुपये की सीमा को पार करने को है।

अब ये ब्‍यूरो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको में निदेशकों की नियुक्ति धन जुटाने के तरीकों और विलय तथा अधिग्रहण के संबंध में सलाह देगा....इसके अलावा ब्‍यूरो लगातार बैंको के निदेशकों के साथ संपर्क में बना रहकर बैंको के लिए आगामी योजना तैयार करने में भी मदद करेगा....साथ ही साथ गैर कार्यकारी अध्‍यक्ष और गैर सरकारी निदेशकों की नियुक्ति करना भी इसी बोर्ड के ज़िम्मे है।

वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस पार्टी ने बैंक बोर्ड ब्‍यूरो के अध्‍यक्ष पद पर पूर्व सीएजी विनोद राय के बनाए जाने पर ऐतराज जताया है.....कांग्रेस के मीडिया प्रभारी विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने टृवीट कर कहा कि प्रधानमंत्री ने राय को पदम अवार्ड दिया है और अब उन्‍हें बैंक बोर्ड ब्‍यूरो का अध्‍यक्ष बना दिया है....उन्होंने कहा कि अरूण जेटली ने पहले कहा था कि सीएजी को सेवा निवृत्ति के बाद कोई पद नहीं दिया जाएगा....तो ऐसे में तो सरकार अपने दिए बयान से ही नुकर रही है....सुरजेवाला ने पूछा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको में नियुक्‍त करने वाली संस्‍था का अध्‍यक्ष राय को बनाने से क्‍या संविधान के अनुच्‍छेद 148(4) का उल्‍लंघन नहीं होता है ?