इशरत जहां मामले के हलफनामे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने

इशरत जहां मामले में नया मोड़ आया है। इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-समाने है। यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में गृह सचिव रहे जीके पिल्लई ने आरोप...

इशरत जहां मामले के हलफनामे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने

ishrat jahanइशरत जहां मामले में नया मोड़ आया है। इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-समाने है। यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में गृह सचिव रहे जीके पिल्लई ने आरोप लगाया कि पी चिदंबरम ने उन्हें दरकिनार कर इस केस का एफिडेविट बदलवाया। पिल्लई के  बाद गृह मंत्रीलय के एक पूर्व अफसर आरवीएस मणि ने दावा किया है कि एफिडेविट बदलने के लिए उन्हें टॉर्चर किया गया था।

एक अंग्रेजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी रहे मणि ने खुलासा किया है कि इशरत और उसके साथियों को आतंकी न बताने का दबाव डाला गया था। मुझसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए एफिडेविट को बदलने के लिए कहा गया। साथ ही मणि ने कहा कि मुझे रबर स्टैम्प बनाने की कोशिश की गई। इशरत मामले में सबूतों को गढ़ने को कहा गया। एसआईटी चीफ सतीश वर्मा ने मुझे बहुत टॉर्चर किया। सीबीआई अफसर मेरा पीछा करते रहते थे। आगे उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली में एक साउथ इंडियन मंदिर में जाता था। सीबीआई की एक महिला अफसर मंदिर तक मेरा पीछा करती थीं, मुझे इतना परेशान किया गया कि परिवार भी दहशत में आ गई। जिसके चलते मेरी मां की मौत हो गई।

वहीं यूपीए सरकार में गृह सचिव रहे जीके पिल्लई ने मंगलवार को कहा कि इशरत जहां एनकाउंटर से जुड़े एफिडेविट में गृह मंत्री रहे चिदंबरम ने उन्हें दरकिनार करते हुए खुद बदलाव करवाया था। एक दूसरे न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक पिल्लई ने कहा कि  चिदंबरम ने आईबी में मेरे जूनियर अफसरों को कॉल किया और एफिडेविट को पूरी तरह बदल दिया, वे खुद बोल कर नया एफिडेविट लिखवा रहे थे। इसलिए किसी ने विरोध नहीं किया।

उधर इस मामले में पी चिदंबरम ने जीके पिल्लई की नीयत पर भी सवाल उठाए हैं। चिदंबरम ने कहा कि एफिडेविट बदला गया था, ऐसा इसलिए किया गया था, क्योंकि पहला एफिडेविट भ्रम फैलाने वाला था। उन्होंने कहा कि ऐसा किसी को बचाने के लिए नहीं किया गया था, बल्कि इस मामले में केंद्र सरकार का पक्ष ठीक से रखने के लिए किया गया था।



इस मामले में भाजपा ने आक्रामक रूख अख्तियार कर लिया है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘ तत्‍कालीन गृह सचिव के बयानों से पर्याप्‍त संदेह उत्‍पन्‍न हुआ जिसकी अंडर सेक्रेटरी ने भी पुष्टि की है कि चिदंबरम ने उन्‍हें परे रखकर निर्णय लिया और पूरे मामले को बदल दिया।’ उन्‍होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम ने ऐसा कांग्रेस आलाकमान के इशारे पर किया।