अभिनेता मनोज कुमार को मिलेगा दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड

फिल्म ‘पूरब और पश्चिम', ‘उपकार' और ‘क्रांति' जैसी देशभक्तिपूर्ण फिल्मों के निर्माता औऱ उनमें यादगार अभिनय के लिए मशहूर अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार को ...

अभिनेता मनोज कुमार को मिलेगा दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड

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फिल्म ‘पूरब और पश्चिम', ‘उपकार' और ‘क्रांति' जैसी देशभक्तिपूर्ण फिल्मों के निर्माता औऱ उनमें यादगार अभिनय के लिए मशहूर अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ आधिकारिक सम्मान दादा साहेब फाल्के अवार्ड के लिए चुना गया है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि 78 वर्षीय अभिनेता अवार्ड पाने वाले 47वें व्यक्ति हैं. भारतीय सिनेमा के इस सर्वोच्च सम्मान के तहत एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये नकद राशि और एक शॉल दिया जाता है।

आपको बता दें कि लता मंगेशकर, आशा भोसलें, सलीम खान, नितिन मुकेश और अनूप जलोटा वाले पांच सदस्यीय चयन मंडल ने सर्वसम्मति से कुमार के नाम की सिफारिश की.

हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी उर्फ मनोज कुमार का जन्म एबटाबाद में हुआ था जो कि आजादी के पहले भारत का हिस्सा था....मनोज कुमार जब 10 बरस के थे तो उनका परिवार दिल्ली में आकर बस गया ....हिंदू कॉलेज से उन्होंने स्नातक किया और फिल्म जगत में करियर बनाने का फैसला किया।

उन्होंने ‘कांच की गुडिया' के साथ 1960 में अपना सफर शुरु किया और ‘हरियाली और रास्ता' से पूरी तरह छा गए।

मनोज कुमार ने ‘हनीमून', ‘अपना बनाके देखो', ‘नकली नवाब', ‘दो बदन', ‘पत्थर के सनम', ‘साजन', ‘सावन की घटा',हरियाली और रास्ता जैसी कई रोमांटिक फिल्में दी....वहीं ‘पूरब और पश्चिम', ‘शहीद', ‘रोटी कपडा और मकान' तथा ‘क्रांति' जैसी फिल्मों से मनोज कुमार ‘भारत कुमार' के नाम से भी मशहूर हो गए

भगत सिंह के जीवन पर आधारित ‘शहीद' फिल्म के बाद देशभक्ति आधारित फिल्मों में उनका खूब नाम हुआ.....वहीं उन्होंने  ‘उपकार' के साथ अपनी निर्देशकीय पारी की शुरुआत की..... इस फिल्म के बारे में कहा जाता है कि यह तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चर्चित नारे जय जवान जय किसान से प्रेरित थी..... इसके बाद मनोज ‘पूरब और पश्चिम', ‘रोटी कपडा और मकान' और ‘क्रांति' समेत कई यादगार फिल्मों में  देशभक्ति के रंग में रंगे नजर आए ।

‘क्रांति' के बाद उनका करियर ग्राफ गिरने लगा. वर्ष 1995 में ‘मैदान ए जंग' में दिखने के बाद उन्होंने अभिनय को अलविदा कह दिया और अपने बेटे कुणाल गोस्वामी को लांच करने के लिए 1999 में फिल्म ‘जय हिंद' के निर्देशन की कमान संभाली लेकिन टिकट खिडकी पर यह फिल्म नहीं चल पायी.

अभिनेता को ‘उपकार' के लिए राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड मिला और 1992 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से नवाजा ।