अासाम मे क्यों हारी कांग्रेस !

भारतीय राजनीति की कहानी विचित्र है इसे समझना बहुत कठिन काम है। चुनाव से पहले नेतागण दल बदने में देर नही लगाते।गौरतलब है कि असम में शर्मा को गोगोई का करीबी माना जाता था और पार्टी में उन्हें गोगोई के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था।कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो चुके है।

अासाम मे क्यों हारी कांग्रेस !




असम में लगातार 15 वर्षों तक सत्ता में रही कांग्रेस के बारे में हेमंत विस्व शर्मा का कहना है कि इस चुनावी नतीजे से पार्टी को अब परेशान नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही इस पूर्व कांग्रेसी नेता जो अब बीजेपी जा चूंके है ने आरोप लगाया कि दो साल पहले जब उन्होंने पार्टी में जारी खींचतान के बारे में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को जानकारी देने की कोशिश कि तो उनका बस यही कहना था, सब ठिक-ठाक है,अाप अपना काम करते रहे  ।

कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो चुके शर्मा का कहना है कि उस बैठक में कांग्रेस उपाध्यक्ष वहां मौजूद लोगों की बात सुनने की बजाए 'अपने कुत्ते के साथ ही खेलने में व्यस्त' थे।असम में बीजेपी की जीत का श्रेय शर्मा को भी दिया जा रहा है, जिसने पार्टी के लिए उत्तर पूर्व का रास्ता खोला। एक बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार माने जाने वाले शर्मा अाज कहीं दिखाई नही पड़ रहे है।उनका नाम उपमुख्यमंत्री के ताैर पर चलाया जा रहा है।

शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को यह मानना होगा कि मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर उसका कोई भविष्य नहीं है पर, जबतक राहुल गांधी अपने को बदलते नही तब तक कांग्रेस का भला संभव नही। राहुल गांधी बड़े ही नासमझ इंसान हैं। उनका व्यहार मालिक जैसा होता है।

गौरतलब है कि असम में शर्मा को गोगोई का करीबी  माना जाता था और पार्टी में उन्हें गोगोई के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था। हालांकि गोगोई द्वारा अपने बेटे गौरव गोगोई को तरजीह दिए जाने से दोनों नेताओं में अलगाव शुरू हो गया और कुछ समय बाद वह कांग्रेस छोड़ बीजेपी से शामिल हो गए।

यह तो सब जानते है कि कांग्रेस मे जम कर चापलुसी अाैर चापलुसो का बोलबाला है । कांग्रेस को कुछ ही गिने चुने लोग हैं जो चला रहे है अाैर ये लोग जन-साधारन को सोनिया अाैर राहूल से मिलने तक नही देते। यही नाराजगी सभी को है कांग्रेस से । हेमंत विस्व शर्मा का कांग्रेस से बीजेपी में जाना ही बीजेपी के लिए बड़ी जीत है तो कांग्रेस के लिए बड़ी हार।