हर बच्चा 'प्रिंस' जितना भाग्यशाली नहीं होता

बोरवेल में गिरने से हो रही बच्चों की मौतों का जिम्मेदार कौन ?

हर बच्चा

पूरा देश प्रर्थना करने में जूटा हुआ था जब पांच साल का प्रिंस हरियाणा के कुरूक्षेत्र जिले के हलदाहेरी गांव में 50 फीट बोरवेल में गिरा था। प्रिंस भाग्यशाली था जिसको सेना ने बचाव कार्य अभियान में बचा लिया लेकिन हर बच्चा प्रिंस जितना भाग्यशाली नहीं होता। देश के हर एक हिस्सों में बोरवेल में बच्चे के गिरने की ख़बरें अक्सर आती रहती हैं।

प्रिंस के बाद ऐसे बहुत सारे मामले सामने आए हैं जिसमें बच्चा बोरवेल में गिरता है और उसको सैना बचाने में जुट जाती है। उनमें से कई बच्चों को बचाया भी गया, लेकिन कई बच्चों की मृत्यु भी हो गई।

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बोरवेल में गिरने से जिन बच्चों की मृत्यु हुई, उनके बारे में एक रिपोर्ट:-

2007 में दो साल का लड़का गुजरात के मदेली गांव में बोरवेल में गिरने की वजह से उसकी मृत्यु हो जाती है। उसी साल दो घटनाओं में एक पांच साल का बच्चा महाराष्ट्र के पुने जिले बोरवेल में गिरने से मौत हो गई और दुसरा 2 साल का बच्चा अमित मध्यप्रदेश के कटनी जिले में 56 फीट के बोरवेल में गिरने के वजह से मरता है।

तमिलनाडु में ही 4 साल का बच्चा 200 फीट के बोरवेल में गिर कर मर जाता है। राजस्थान के डोसा गांव में अंकित नाम का 3 साल का बच्चा को मृत्यु का सामना करना पड़ता हैं।

2013 में तमिलनाडु के दिण्डीगल के पास 7 साल कि मुथ्थूलक्ष्मी नाम की बच्ची बोरवेल में गिरने के वजह से मर जाती है। हालांकि उसको बचाने के लिए सैना ने 15 घंटे जक बचाव अभियान चलाया था।

फिर 2015 में वैलोर के पास ढाई साल साल का बच्चा 350 फीट बोरवेल में गिरने से अपनी जान गवां देता है। ऐसे बहुत सारे घटनाएं घटित हुई है जिसमें कई बच्चों ने अपने जान गवानी पड़ती है और भी ऐसे घटनाएं जिसमें सैना की मदद से बच्चों को बचा लिया गया है।

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अब बात यह है कि ये घटनाएं क्यो हो रही हैं ? ”अल जजीरा” के एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में हो रहे बोरवेल मौतों का जड़ माफिया समूहों, बिल्डरों द्वारा अवैध भूजल निकासी कि वजह से हो रही है।

सुदिपतो राॅय जो हाईड्रोलोजिस्ट है उनहोंने अल जजीरा के रिपोर्टर्स से बात करते हुए बताया कि ”यह एक दुष्चक्र है” इस तरह के मौत लगातार होते रहेंगे जब तक अवैध निर्माण कार्य और पानी की काला बजारी होती रहेगी।