कानपुर हादसे में 127 लोगों की मौत, राहत कार्य जारी, और लोगों के दबे होने की खबर

कानपुर में हुए रेल हादसे में 127 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे की जांच उच्च स्तर पर होगी ऐसा हवाला दिया जा रहा है हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी कुछ नहीं कहा जा रहा है...

कानपुर हादसे में 127 लोगों की मौत, राहत कार्य जारी, और लोगों के दबे होने की खबर

कानपुर में हुए रेल हादसे के पीछे पटरियों में दरार एक कारण हो सकता है। ऐसी खबर सूत्रों के हवाले से आ रही है हालांकि आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा। उच्चस्तरीय जांच का हवाला दिया जा रहा है। इंदौर-पटना एक्सप्रेस के रविवार को पटरी से उतरने की घटना में अब तक 127 लोगों की जान जा चुकी है और 200 लोग घायल हो गए है। रातभर राहत और बचाव का काम चला। ढेरों यात्री अपने लापता परिजनों की तलाश में भटक रहे हैं और परेशान हो रहे हैं। अभी भी राहत और बचाव कार्य जारी है। कुछ और लोगों के फंसे होने की आशंका है।

इधर, हादसे के बाद घायलों और बाकी बचे यात्रियों को लेकर ट्रेन पटना पहुंची, जिसमें करीब 350 यात्री सवार थे।प्रशासन की ओर से यात्रियों को उनके घर तक पहुंचाने का इंतज़ाम किया गया था। जिन लोगों को ट्रेन से आगे जाना था उन्हें फ़्री पास दिया गया और जिन्हें रोड के जरिए जाना था उनके लिए भी गाड़ियों का इंतज़ाम किया गया था।

गौरतलब है कि यह हादसा कानपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर पुखरायां के पास तड़के 3 बजे हुआ, जहां ट्रेन के करीब 14 डब्बे पटरी से उतर गए। इनमें से 4 डिब्‍बे बुरी तरह क्षतिग्रस्‍त हो गए। इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में बचे यात्रियों के चेहरों पर खौफ अब भी कायम है और उनकी बातों से साफ झलक रहा था कि वो किस तरह मौत के मुंह से निकल कर आ रहे हैं।

बता दें कि ट्रेन के कुछ डिब्बे हादसे से कम प्रभावित हुए लेकिन उसके अंदर के नज़ारा दिल दहला देने वाला था। सुबह करीब तीन बजे हादसे के बाद यात्रियों के दहशत में इधर उधर भागने से चादरें, कंबल, तकिए, खाना, सूटकेस, बैग सब बिखरे हुए थे। ट्रेन के बाहर 17 साल की एक लड़की अपने भाई को ढूंढने की कोशिश कर रही थी। दोनों भोपाल में एक तैराकी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने के बाद पटना लौट रहे थे। उनके साथ उनकी मां भी मौजूद थीं। इस दर्दनाक माहौल में कुछ साहसी कहानियां भी सुनने को मिल रही थीं कि किस तरह एक बचावकर्मी ने पांच यात्रियों को जिंदा बाहर निकाला।

एक बचावकर्मी ने कहा कि जीवित लोगों को निकाल लिया गया है और डिब्बों में सिर्फ शव ही रह गए हैं। उन्होंने कहा कि आधे डिब्बों को साफ कर दिया गया है। बचाव कार्य में बाद में सेना भी शामिल हो गई थी और उसने अपने 90 जवानों को तैनात किया था। इसके अलावा 50 सदस्यीय एक मेडिकल टीम भी तैनात की थी, जिसमें पांच डाक्टर थे।