नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा गांवों, कस्बों से आई नकदी

भारत में नकद आधारित अर्थव्यवस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं और मजबूत है। इसका पता इस बात से चलता है कि नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुई रकम में से करीब आधा पैसा ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से आया है।

नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा गांवों, कस्बों से आई नकदी

भारत में नकद आधारित अर्थव्यवस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं और मजबूत है। इसका पता इस बात से चलता है कि नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा हुई रकम में से करीब आधा पैसा ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक में नोटबंदी के बाद से 25 नवंबर तक कुल 1.9 लाख करोड़ रुपये नकदी के रूप में जमा हुए हैं। वहीं इस दौरान करीब 7,905 करोड़ रुपये के पुराने बड़े नोट बदले गए और 51,829 करोड़ रुपये की निकासी की गई है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा है कि कुल नकदी जमा राशि में ग्रामीण और कस्बाई इलाकों से करीब 54-55 फीसदी रुपये जमा कराए गए है। इसका मुख्य कारण यह है कि इन इलाकों में कारोबार और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियां मुख्य रूप से नकदी पर आधारित हैं। वहीं एसबीआई के पास कुल जमा रकम में ग्रामीण इलाकों से 20 फीसदी, कस्बाई इलाकों से 36 से 37 फीसदी जमा कराए गए। शहरी इलाकों की कुल जमा राशि में 25 फीसदी और महानगरों की 18 फीसदी हिस्सेदारी है।

एबसीआई के एक अधिकारी ने कहा है कि शहरों और महानगरों की बात करें तो यहां उपभोक्ता अधिकतर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों से लेनदेन करते हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने बताया है कि उसके पास 32,000 करोड़ रुपये जमा हुए, जिसमें ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में ज्यादा नकद राशि जमा हुई।