नीतीश जैसा नहीं बनना चाहते अखिलेश...इसलिए यूपी में नहीं हो सकता महागठबंधन- नारदा न्यूज स्पेशल

कई बड़े नेता यूपी में महागठबंधन ना बन पाने की वजह मुलायम सिंह के अड़ियल रवैये को बता रहे है। लेकिन सच्चाई ये है कि यूपी के सीएम अखिलेश ही महागठबंधन नहीं चाहते हैं।

नीतीश जैसा नहीं बनना चाहते अखिलेश...इसलिए यूपी में नहीं हो सकता महागठबंधन- नारदा न्यूज स्पेशल

यूपी में बिना महागठबंधन बीजेपी को हराना मुश्किल है। ऐसा विपक्ष के कई नेताओं को लगता है। चौधरी अजित सिंह, शरद यादव, केसी त्यागी समेत कई बड़े नेताओं को लगता है की यूपी में महागठबंधन जरुरी है। कई बड़े नेता यूपी में महागठबंधन ना बन पाने की वजह मुलायम सिंह के अड़ियल रवैये को बता रहे है। लेकिन सच्चाई ये है कि यूपी के सीएम अखिलेश ही महागठबंधन नहीं चाहते हैं।

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यूपी में दोबारा जीत जरुरी है लेकिन उन शर्तो पर नहीं जिसमे सरकार पर बाहरी लोगों का दबाव हावी रहे। या फिर यूं कहे जिस सरकार में बाहरी लोगों का हस्तक्षेप ज्यादा हो। यूपी के सीएम फ्युचर में उन शर्तो पर सरकार नहीं चलाना चाहते जिसमे बाहरी दखल ज्यादा हो। या फिर वैसी सरकार जैसी बिहार में चल रही है। जिसके मुखिया नीतीश कुमार है। ये जगजाहिर है कि बिहार में महागठबंधन की सरकार है। और कई मौकौ पर नीतीश कुमार को कंप्रोमाइज करना पड़ता है। कई बार पार्टी लाइन को लेकर लालू यादव की पार्टी राजद और जदयू के बीच दिक्कते आई है। वही अखिलेश को लगता है कि अगर महागठबंधन हुआ तो दूसरी पार्टियों का भला हो जाएगा।

यूपी में सियासी जंग का ऐलान अभी भले ही ना हुआ हो लेकिन राजनीतिक बिसात जरूर बिछनी हो गई है. यूपी चुनाव के लिए चौधरी अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में गठबंधन हो गया. इससे पहले अजित सिंह का मुलायम सिंह यादव के साथ भी बैठकों का दौर चला था लेकिन बात नहीं बन पाई...गठबंधन के बाद अजित ने सिंह ने कहा, ”हम चाहते थे कि लोहिया और चौधरी चरण सिंह के अनुयायियों को एक मंच पर लाये लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. आज आरएलडी जेडीयू और बीएस4 एक मंच पर है. अब हमने तय किया है कि हम तीन पार्टियां और भी कई छोटी पार्टियां है एक मंच पर होंगे. जो सपने चौधरी जी के थे जो सपने लोहिया जी के थे वो एक अलग दिशा मिलेगी.”

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मुलायम के साथ गठबंधन ना होने के सवाल पर अजित सिंह ने कहा, ”मुलायम सिंह यादव ने ही बिहार में भी गठबंधन के लिए मना किया था. यहां भी वो ही मना कर रहे है अब ये तो उनसे पूछना पड़ेगा की आखिर वो क्यों नही सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ महागठबंधन नही चाहते. 5 नवंबर को मूलायम सिंह यादव ने ही गठबंधन पर बातचीत के लिए बुलाया था लेकिन खुद पीछे हट गए.”

आपको बता दें कि कांग्रेस समेत कई विपक्षी दस यूपी में बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन बनाना चाहते हैं लेकिन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने अभी तक इसके लिए हामी नहीं भरी है. कुछ दिन पहले अखिलेश ने कहा था कि हम अगर अकेले लड़ेंगे तभी पूर्ण बहुमत लाएंगे लेकिन अगर गठबंधन होता है तो दूसरी पार्टियों का भी कुछ भला हो जाएगा. राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा है  कि उनके अड़ियल रवैए की वजह से ही यूपी में महागठबंधन नहीं बन पाया.

अब बगैर मुलायम के ही बनेगा यूपी में गठबंधन

अजित ने दावा किया कि अब बगैर मुलायम के ही यूपी में गठबंधन बनेगा, जिसमें फिलहाल जनता दल (युनाइटेड), आरएलडी और बीएस 4 शामिल होगा.

अजित, शरद और त्यागी ने साधा मुलायम पर निशाना

उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश थी की चौधरी चरण सिंह व डॉ. राम मनोहर लोहिया के अनुयायी एक मंच पर आकर सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन बनाएं, लेकिन यह सफल नहीं हो पाया. मुलायम चाहते हैं कि यूपी में गठबंधन न बने, बल्कि समाजवादी पार्टी में अन्य पार्टियों का विलय हो जाए.”

सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एक मजबूत मंच

शरद यादव ने कहा, “यूपी में महागठबंधन बनाने की कवायद शुरू हुई थी, जो अपने अंजाम तक नही पहुंच पाई. लखनऊ में ही पांच नवंबर को सभी लोग एक मंच पर एकत्र हुए थे कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ एक मजबूत मंच तैयार हो सके, लेकिन मुलायम के रुख की वजह से ऐसा नहीं हो पाया.”

‘मुलायम के अड़ियल रवैए से नहीं बन पाया महागठबंधन’

शरद ने कहा, “मुलायम के रवैये की वजह से ही महागठबंधन नहीं बन पाया. हम चाहते थे कि सभी लोग एकजुट हों, इसीलिए पांच नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, अजित सिंह सहित तमाम लोग एक मंच पर एकत्र हुए थे, लेकिन यह कोशिश बेकार हो गई.”

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यूपी में महागठबंधन के बिना बीजेपी को हराना मुश्किल

सांसद के.सी. त्यागी ने कहा, “लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी को कुल 42.1 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि एसपी और बीएसपी मिलकर केवल 42.2 प्रतिशत पाने में ही कामयाब हुए थे. इसीलिए ये दोनों दल भी अगर मिल जाएं तो बीजेपी को नहीं हरा सकते. यूपी में महागठबंधन के बिना बीजेपी को हराना मुश्किल है.” मुलायम सिंह बिहार चुनाव में महागठबंधन बनाने को सहमत हो गए थे. सभी चीजों पर सहमति बन गई थी, लेकिन बाद में वह पीछे हट गए. बिहार में महागठबंधन चाहते थे और यूपी में उन्होंने पार्टियों के विलय की शर्त रख दी. यह सर्वथा अनुचित था. अब गठबंधन एक अलग शक्ल में रहेगा और यूपी में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगा. जल्द ही इसका स्वरूप सबके सामने होगा