विश्व के महान क्रांतिकारी और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो पर CIA ने किया था 638 बार हमला

क्यूबा क्रांति के बाद से ही फिदेल कास्त्रो अमेरिका के निशाने पर थे फिदेल पर अमेरिका का खुफिया जांच एजेन्सी सीआईए ने 638 बार हमला किया था...

विश्व के महान क्रांतिकारी और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो पर CIA ने किया था 638 बार हमला

90 साल के विश्व के महान क्रांतिकारी फिदेल कास्त्राे का आज क्यूबा की राजधानी हवाना में निधन हाे गया है। बताया जा रहा है कि फिदेल काफी दिनाें से बीमार थे, उनका इलाज चल रहा था। 1959 में हुए क्यूबा क्रांति में फिदेल कास्त्राे नायक थे। सूत्राें के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताविक क्यूबा क्रांति के बाद फिदेल पर अमेरिका का खुफिया जांच एजेन्सी  सीआईए ने 638 बार हमला किया था लेकिन वह बचते रहे।

बता दें कि अगस्त में 90 साल पूरे करने वाले फिदेल कास्त्रो बीते 10 साल से स्वास्थ्य ठीक न होने की वजह से सत्ता से दूर थे। उनकी जगह उनके भाई राउल कास्त्रो क्यूबा का सत्ता संभाल रहे हैं। फिदेल कास्त्रो क्यूबा क्रांति के प्रमुख नेता माने जाते हैं। फिदेल साल 1959 से दिसंबर 1976 तक क्यूबा के प्रधानमंत्री रहे थे। इसके बाद वह क्यूबा के राष्ट्रपति बने। उन्होंने फरवरी 2008 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन उन्होंने साल 2006 में ही अपने भाई को सत्ता हस्तांतरण कर दिया था।

फिदेल कास्त्रो क्यूबा की क्रांति के जरिए ही फुल्गेंकियो बतिस्ता की तानाशाही को उखाड़ फेंक सत्ता में आए थे और उसके कुछ समय बाद ही वे क्यूबा के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद से ही फिदेल कास्त्रो अमेरिका के निशाने पर थे आैर अमेरिका की खुफिया जांच एजेन्सी सीआईए ने फिदेल कास्त्राे पर 638 बार हमला किया था। मालूम हो, फुल्गेंकियो बतिस्ता को अमेरिका समर्थित नेता माना जाता था।

आधी शताब्दी तक क्यूबा पर राज करने वाले फिदेल कास्त्रो को सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेताओं में शामिल किया जाता रहा है। शीतयुद्ध के दौरान सोवियत सेना को अमेरिका के खिलाफ अपनी सीमा में मिसाइल तैनात करने की मंजूरी देकर फिदेल कास्त्रो दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए थे।



कास्त्रो को 15 साल की सज़ा सुनाई गई। लेकिन 19 महीने की सज़ा के बाद कास्त्रो को रिहा कर दिया गया। जेल में अपनी सज़ा के दौरान कास्त्रो ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था और वो दिन-रात मार्क्सवादी साहित्य में डूबे रहते थे। यह वो दौर था जब फुलखेंशियो बतीस्ता अपने विद्रोहियों को निपटा रहा था। ऐसे में गिरफ़्तारी से बचने के लिए कास्त्रो क्यूबा छोड़ मेक्सिको चले गए। यहीं उनकी मुलाक़ात नामी क्रांतिकारी चे ग्वेरा से हुई।

कास्त्रो के संचालन में बनी क्यूबा की नई सरकार ने ग़रीबों से वायदा किया कि लोगों को उनकी ज़मीनें लौटा दी जाएंगी और ग़रीबों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कई बार अपने भाषणों में कहा कि देश में साम्यवाद या मार्क्सवाद नहीं है, बल्कि एक ऐसा लोकतंत्र है, जिसमें सभी को प्रतिनिधित्व की आज़ादी है।1960 में फ़िदेल कास्त्रो ने अमरीकी स्वामित्व वाले सभी व्यवसायों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। जवाब में, वाशिंगटन ने क्यूबा पर कई व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए।

क्यूबा इस दौर में एक शीत युद्ध का मैदान बन गया था। कास्त्रो दावा करते थे कि सोवियत संघ और उसके नेता निकिता ख्रुश्चेव ने उनसे समझौते का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद ही दोनों के बीच संधि हुई और उन्हें सोवियत संघ का समर्थन मिला। दूसरी ओर अमरीका कास्त्रो की सरकार का तख़्ता पलट करवाने के लिए क्यूबा के राजनीतिक कैदियों के साथ मिलकर एक निजी सेना बना रहा था।