देश का पहला संविधान दिवस... एक नए इतिहास की शुरुआत

आज देश का पहला संविधान दिवस है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि 26 जनवरी की अहमियत 26 नवंबर से ही जुड़ी हुई है। आखिर, 26 नवंबर 1949 को ही संविधान सभा ने संविधान को अपनाने संबंधी प्रस्ताव पारित किया था...

देश का पहला संविधान दिवस... एक नए इतिहास की शुरुआत

आज देश का पहला संविधान दिवस है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि 26 जनवरी की अहमियत 26 नवंबर से ही जुड़ी हुई है। आखिर, 26 नवंबर 1949 को ही संविधान सभा ने संविधान को अपनाने संबंधी प्रस्ताव पारित किया था।आइए जानते हैं संविधान से जुड़ी कुछ रोचक बातें...

मालूम हो, हमारे देश का संविधान 3 प्रमुख भागों में बंटा है। पहले भाग में संघ और राज्य क्षेत्रों के विषय में टिप्पणी की गई है और राज्यों व उनके  अधिकारों का वर्णन किया गया है।

दूसरे भाग में नागरिकता के बारे में विस्तार किया गया है। भारतीय नागरिक कहलाने का अधिकार किन लोगों के पास है और किन लोगों के पास नहीं है।


वहीं तीसरे भाग में भारतीय संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया गया है।


29 अगस्त 1947 को डॉ. आंबेडकर को स्वतंत्र भारत के संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।




26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने संविधान को अपना लिया। अपने काम को पूरा करने के बाद, बाबा आंबेडकर ने कहा :

मैं महसूस करता हूं कि संविधान, साध्य (काम करने लायक) है, यह लचीला है पर साथ ही यह इतना मजबूत भी है कि देश को शांति और युद्ध दोनों के समय जोड़ कर रख सके। वास्तव में, मैं कह सकता हूं कि अगर कभी कुछ गलत हुआ तो इसका कारण यह नहीं होगा कि हमारा संविधान खराब था, बल्कि इसका उपयोग करने वाला मनुष्य अधम था।




भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। इसमें 395 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियां हैं, जो 22 भागों में विभाजित है ।



इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद थे, जो 22 भागों में विभाजित थे। इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं।



जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मौलाना अबुल कलाम आजाद संविधान निर्माण सभा में प्रमुख सदस्य थे।



संविधान सभा ने 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन में कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतंत्रता थी।



भारत के संविधान के निर्माण में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, इसलिए उन्हें संविधान का निर्माता कहा जाता है।