विश्व के महान क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्राे का निधन

क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्राे का निधन हो गया। फिदेल कास्त्राे काफी लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे।

विश्व के महान क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्राे का निधन

क्यूबा के महान क्रांतिकारी और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो का 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। क्यूबा में मौजूदा राष्ट्रपति एवं फिदेल के भाई राउल कास्त्रो ने ट्वीट कर यह जानकारी दी। बताया जा रहा है कि फिदेल कास्त्राे कि तबीयत बहुत खराब थी और कई दिनाें से उनका इलाज चल रहा था। उनकी लंबी बीमारी के कारण  माैत हुई है।

बता दें कि क्यूबा में साल 1959 में हुई क्रांति के नेता फीदेल कास्त्रो ने इसी साल अगस्त में अपना 90वां जन्मदिन मनाया था। स्वास्थ्य कारणों से बहुत कम दिखाई देने वाले कास्त्रो के जन्मदिन पर कार्ल मार्क्स सभागार में समारोह आयोजित किया गया था। इस जन्मदिन समारोह का लाइव टेलीकास्ट पूरे देश ने देखा गया था और खुशियां मनाईं थी। जैसे आधी रात में तारीख बदली, वैसे ही बैंड ने हैप्पी बर्थडे की धुन बजाई थी। फिदल कास्त्राें एक महान नेता के साथ-साथ एक महान क्रांतिकारी भी थे। वह अमेरिका की साम्राज्यवाद का खुल कर विराेध करते थे।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने आज क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो के निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें 20वीं सदी की इतिहास रचने वाली हस्तियों में से एक तथा भारत का ‘‘अच्छा मित्र’’ बताया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया ‘फिदेल कास्त्रो के निधन पर मैं क्यूबा की सरकार और जनता के प्रति गहरी संवेदनाएं जाहिर करता हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले।’ उन्होंने कहा ‘फिदेल कास्त्रो 20वीं सदी की इतिहास रचने वाली हस्तियों में से एक थे। भारत अपने एक महान दोस्त के निधन पर शोकग्रस्त है।’ मोदी ने कहा कि भारत दुख की इस घड़ी में क्यूबा की सरकार और वहां की जनता के साथ हैं।

जब दुनिया भर में कम्युनिस्ट शासन ढहते जा रहे थे। तब फ़िदेल कास्त्रो अपने सबसे बड़े दुश्मन संयुक्त राज्य अमरीका की खुलकर आलोचना करते रहे और लाल झंडे को कभी झुकने नहीं दिया। कास्त्रो के प्रशंसक उन्हें समाजवाद का सूरमा मानते हैं और एक ऐसा सैन्य राजनीतिज्ञ मानते हैं, जिसने अपने लोगों के लिए क्यूबा को आज़ाद कराया। उन पर यह आरोप भी लगते रहे कि उन्होंने क्रूर तरीकों से अपने विपक्षियों को दबाया और साथ ही ख़राब आर्थिक नीतियों की वजह से क्यूबा की अर्थव्यवस्था को कमजाेर बना दिया

बता दें कि कास्त्रो करीब आधी शताब्दी तक अमरीका की आंख की किरकिरी बने रहे। इस दौरान कई बार उन्हें मारने की साजिश रची गई लेकिन वह बाल-बाल बचते रहे। माना जाता है कि इन साजिशों के पीछे अमरीकी खुफिया संस्था सीआईए थी। बताया जा रहा है कि अमेरिका की खुफिया जांच एजेन्सी सीआईए ने फिदेल कास्त्रो काे 638 बार मारने की काेशिश की था। फिदेल सिर्फ महान नेता ही नहीं बल्कि 'हिम्मत' वाले भी थे क्योंकि जहां पूरी दुनिया अमरीका जैसे देश से पंगा लेने से पीछे हटती है वहीं उसी की 'नाक के नीचे' क्यूबा, जो अमरीका के दक्षिण में स्थित है वामपंथ का हाथ मजबूती से पकड़ रखा है। कास्त्रो की अमरीका से 'पंगा' लेने की आदत को दुनिया भर में काफी दिलचस्पी से देखा जाता रहा है, फिर वो खुलेआम अमरीका के सबसे बड़े दुश्मन रह चुके सोवियत यूनियन से दोस्ती रखना हो।

फ़िदेल अलज़ांद्रो कास्त्रो रुज़ का जन्म 13 अगस्त 1926 को एक धनी किसान के घर हुआ था। उनकी मां का नाम लीना रुज़ था, जो उनके पिता की सेविका थीं लेकिन कास्त्रो के जन्म के बाद उनके पिता ने लीना से शादी कर ली था। सैंटियागो के कैथोलिक स्कूलों में कास्त्रो ने अपनी स्कूली पढ़ाई की थी। इसके बाद की पढ़ाई करने के लिए वो हवाना चले गए।

1940 के दशक के मध्य में हवाना विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई करते वक्त ही कास्त्रो राजनीतिक कार्यकर्ता बने। उन्होंने जल्द ही सार्वजनिक वक्ता के रूप में अपनी पहचान बना ली थी और लोग उन्हें सुनना पसंद करने लगे थे।

अमरीका की ओर से लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को 45 साल तक झेलने वाले क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने आइजनहावर से लेकर क्लिंटन तक 11 अमरीकी राष्ट्रपतियों का सामना किया। जॉर्ज डब्ल्यू बुश के शासनकाल में उन्हें सबसे ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ा था।

वहीं पर इस कटुता को दूर करने की नीयत से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इसी साल मार्च में हवाना दौरे पर आए। यह किसी अमेरिकी नेता की 88 साल में पहली क्यूबा यात्रा थी। ओबामा ने इस दौरान क्यूबा की जनता से भी बात की और लोकतंत्र की चर्चा की। फीदेल को यह नागवार लगा। उन्होंने इसकी निंदा भी की।