लोकपाल पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल की नियुक्ति में देरी पर बुधवार को केंद्र सरकार को लताड़ लगाई। कोर्ट ने कहा कि उसे इस कानून को निरर्थक शब्द नहीं बनने देना चाहिए...

लोकपाल पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार में लोकपाल की नियुक्ति न होने पर बुधवार को निराशा जताई। कोर्ट ने पूछा कि क्या मोदी सरकार लोकपाल की नियुक्ति करने में अपना पूरा बचा कार्यकाल लगा देगी? लोकपाल एक्ट को 1 जनवरी 2014 को नोटिफाई किया गया था।

मोदी सरकार ने लोकपाल के लिए उपयुक्त कैंडिडेट तलाशने वाली सर्च कमिटी में विपक्ष के नेता को सदस्य बनाने की जगह सदन में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के लीडर को शामिल करने से जुड़ा मामूली बदलाव अब तक नहीं किया है।

सरकार का कहना है कि लोकपाल ऐक्ट को जल्दबाजी में लाया गया था और उसमें कई लूपहोल हैं, जिन्हें ठीक करना होगा। लॉ मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि इन बदलावों के बिना लोकपाल प्रभावी नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद बनाए गए लोकपाल कानून को सिर्फ इसलिए निष्प्रभावी नहीं होने दिया जाना चाहिए कि इसकी चयन समिति में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को शामिल करने के लिए संशोधन बिल पारित नहीं हो सका है। केंद्र ने दलील दी थी कि चयन समिति में विपक्ष के सबसे बड़े दल के नेता को शामिल करने के लिए बिल लंबित है।

पीठ ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से जानना चाहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता को चयन समिति में शामिल करने के लिए क्या हम आदेश नहीं दे सकते हैं? अटार्नी जनरल ने पीठ से कहा कि मौजूदा हालात में न्यायालय द्वारा पारित कोई भी आदेश न्यायिक तरीके से कानून बनाने जैसा होगा। इस पर पीठ ने मामले की सुनवाई 7 दिसंबर के लिए स्थगित कर दी।