शादी से परेशान बेटी को पीएम ने भिजवाए 20,000 रूपए

नोटबंदी के चलते एक लड़की अपनी शादी को लेकर परेशान थी। उसने पीएम मोदी को खत लिखा जिसके बाद पीएम ने उसकी मदद की और उसके परिवार को शादी के लिए 20,000 रूपए भेजे...

शादी से परेशान बेटी को पीएम ने भिजवाए 20,000 रूपए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने से परेशान एक परिवार की मदद की है। वह परिवार पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में रहता है। जितेंद्र साहू नाम के एक शख्स की बेटी की शादी होनी है। वह फिलहाल बेरोजगार है लेकिन उसने कुछ पैसे जोड़ रखे थे जो वह शादी में लगाना चाहता था लेकिन नोटबंदी ने उसका ये रास्ता भी बंद कर दिया। इस पर जितेंद्र की बेटी ज्योति साहू ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा। उस पत्र में ज्योति ने अपने परिवार की सारी परेशानियों का जिक्र किया था। ज्योति ने 9 नवंबर यानी नोटबंदी के अगले दिन ही पीएम मोदी को पत्र भेज दिया था। लेकिन 9 दिन बाद जो हुआ उसने ज्योति के साथ-साथ उसके परिवार के बाकी लोगों को भी चौंका दिया। जिले का एक अधिकारी उनके घर पर आया और उसने जितेंद्र साहू को 20 हजार रुपए नकद थमा दिए। जिला अधिकारी ने जानकारी दी कि वह पैसा पीएम मोदी ने ज्योति का पत्र पढ़ने के बाद भेजा है।

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 8 नवंबर की रात को नोटबंदी का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि 30 दिसंबर के बाद से 500 और 1000 रुपए के नोट चलने बंद हो जाएंगे। तब से ही बैंक और एटीएम के बाहर की लाइन खत्म होने का नाम नहीं ले रही। हालांकि, सरकार की तरफ से वक्त-वक्त पर नीतियों में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं लेकिन उससे कोई खास फायदा होता दिख नहीं रहा है।

बता दें कि नोटबंदी पर विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेरने की कोशिश में लगा है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने 55 व्यक्तियों की एक सूची जारी की जिन्होंने उच्च मूल्य के नोट चलन से बाहर होने के मद्देनजर बैंकों और एटीएम के बाहर पंक्ति में खड़े रहने के दौरान अपनी जान गंवाई। रणदीप सुरजेवाला ने उन सबके परिवारों को मुआवजे के साथ ही उनकी मौत की जांच की भी मांग की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि तानाशाह प्रधानमंत्री के कठोर निर्णय के चलते 55 मौतें हुईं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? प्रधानमंत्री को उन व्यक्तियों के परिवारों से माफी मांगनी चाहिए जिन्होंने अपनी जान गंवाई और उन्हें देश से भी माफी मांगनी चाहिए। यह उनके असंगत निर्णय के चलते हुआ है।

इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नोटबंदी के खिलाफ एकजुट होकर दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्रदर्शन किया था। ममता बनर्जी ने शिवसेना के नेताओं के साथ मिलकर राष्ट्रपति भवन तक एक किलोमीटर का पैदल मार्च भी किया था। उन्होंने नोटबंदी का फैसला वापस लेने के लिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था जिस पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।