नोटबंदी पर चर्चा: सरकार ने कहा देश के हित में फैसला तो विपक्ष ने कहा आर्थिक अराजकता

शीतकालीन सत्र के पहले दिन नोटबंदी और इससे आम जनता को हो रही परेशानी के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार काले धन की परिभाषा बताए...

नोटबंदी पर चर्चा: सरकार ने कहा देश के हित में फैसला तो विपक्ष ने कहा आर्थिक अराजकता

नोटबंदी के सरकार फैसले से देश के लोगों को विशेषकर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को होने वाली भारी परेशानी की ओर ध्यान दिलाते हुए विपक्ष ने आज आरोप लगाया कि इस न केवल देश में आर्थिक अराजकता पैदा हो गई बल्कि पूरी दुनिया में यह संदेश गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में काले धन का बोलबाला है।

हालांकि सरकार ने इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि देश के ज्यादातर लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और इस फैसले दीर्घकाल में ब्याज कम होने के साथ-साथ आम लोगों को कई फायदे मिलेंगे। मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह देश हित में उठाया गया कदम है और पहली बार देश में ईमानदारों का सम्मान और बेईमानों को नुकसान हुआ है।

आपको बता दें कि राज्यसभा में आज शीतकालीन सत्र के पहले दिन नोटबंदी और इससे आम जनता को हो रही परेशानी के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार सबसे पहले यह बताए कि काले धन की परिभाषा क्या है। कांग्रेस के आनंद शर्मा ने नोटबंदी के मुद्दे पर उच्च सदन में चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में 500 रूपये और 1000 रूपये के नोटों को आधी रात से अमान्य किए जाने का ऐलान किया। ‘स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संदेश के माध्यम से इतने बड़े फैसले की जानकारी दी।

उन्होंने कहा ‘प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि काले धन, आतंकवाद पर रोक के लिए यह कदम जरूरी है। रूपये का उपयोग आतंकवादी भी कर रहे हैं और जाली मुद्रा भी चलन में है। इसलिए यह कदम जरूरी है।’ शर्मा ने कहा कि जब यह ऐलान किया गया तब देश में 16 लाख 63 हजार के करेंसी नोट सकरुलेशन में थे और इनमें से 86.4 फीसदी नोट 500 और 1000 रूपये के नोटों के थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह 86.4 फीसदी नोट काले धन का था जो बाजार में लगा था।’