नोटबंदी का ‘नाटक’ उद्योगपति दोस्तों की मदद के लिए किया गया -शर्मिष्ठा मुखर्जी

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए नोटबंदी को एक बड़ा घोटाला बताया। उन्होने नोटंबदी और सामने आ रहे घोटालों पर संयुक्त संसदीय कमेटी (जेपीसी) जांच की मांग की है।

नोटबंदी का ‘नाटक’ उद्योगपति दोस्तों की मदद के लिए किया गया -शर्मिष्ठा मुखर्जी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘धमाका’ पॉलिटिक्स में भरोसा रखते हैं और बड़े नोटों को बंद करने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि उन्हें उत्तर प्रदेश में कुछ संभावनाएं दिखाई दी। नोटबंदी का फैसला केंद्र सरकार ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए किया है। नोटबंदी आजाद हिंदुस्तान का सबसे बड़ा घोटाला है। इस तरह के तमाम आरोप कांग्रेस, बीजेपी और केंद्र सरकार पर लगा रही है। देश भर में नोटबंदी पर जारी संग्राम के बीच नारदा न्यूज के पॉलिटिकल एडिटर विकास राज तिवारी ने दिल्ली कांग्रेस की प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी से खास बातचीत की।नारदा न्यूज से इस खास बातचीत में मुखर्जी ने केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाते हुए नोटबंदी को एक बड़ा घोटाला बताया। उन्होंने नोटंबदी और सामने आ रहे घोटालों पर संयुक्त संसदीय कमेटी जेपीसी जांच की मांग की है। पेश है विकास राज तिवारी और शर्मिष्ठा मुखर्जी के बीच बातचीत के अंश...

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शर्मिष्ठा जी आप और आपकी पार्टी नोटबंदी का विरोध कर रही है। आप लोग नोटबंदी को घोटाला बता रहे है। आखिर नोटबंदी से कांग्रेस को क्या प्रॉब्लम है ?

नोटबंदी की वजह से देश लाइन में खड़ा है। गरीब आम जनता परेशान है। सितंबर 2016 से नवंबर 2016 के बीच 8 प्रोपर्टीज खरीदे गए है जिसमें बिहार में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के नाम से भी प्रोपर्टीज है। ये जल्दबाजी क्या है, कोलकाता बीजेपी यूनिट ने नोटबंदी के एलान से कुछ घंटे पहले एक करोड़ रुपए बैंक में जमा कराए है। पश्चिम बंगाल के बीजेपी नेताओं ने नोटबंदी के फैसले के चार दिन पहले भी करोड़ों का कैश जमा कराया है। ये सारी चीजें इंडिकेट करती है कि बीजेपी के बड़े नेताओं को नोटबंदी की खबर पहले से थी। ये एक वेल प्लानड साजिश है। ये बहुत बड़ा घोटाला है जो केंद्र सरकार ने किया है। सरकार के इस घोटाले से देश भर की जनता परेशान है। इस साल सितंबर महीने में कुल 5.98 करोड़ रुपये बैंकों में जमा कराये गये जो पिछले साल इसी महीने में जमा कराये गये कुल रुपये से करीब 13.46 फीसदी ज्यादा हैं और दो साल में अपने आप में एक रिकार्ड है। ऐसे में हम जानना चाहते हैं कि वो कौन लोग हैं जिन्होंने इतने पैसे जमा कराए, हम इस मामले में जेपीसी जांच की मांग करते है।

आप का ये आरोप है कि बीजेपी के बड़े नेताओं को नोटबंदी के बारे में पहले से पता था लेकिन विपक्ष के कई नेताओं का कहना है कि नोटबंदी के बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली तक को जानकारी नहीं थी।

दूसरे पार्टी के नेता क्या कह रहे है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कांग्रेस ये मानती है कि देश में नोटबंदी के जरिए बड़ा घोटाला हुआ है और इस मसले पर जेपीसी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी ही नहीं पूरा विपक्ष नोटबंदी जैसे घोटाले पर जो सरकार ने किया है जेपीसी जांच की मांग करती है।

बहुत दिनों बाद राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बोले और नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठाया जिसके बाद सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगा कि स्थिति अब के पीएम बनाम तब के पीएम जैसी दिख रही है आप क्या मानती है?

मोदी सरकार ने इतना बड़ा फैसला लिया और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी से सलाह लेने की जहमत तक नहीं उठाई। अब जब डॉ मनमोहन सिंह जैसे अनुभवी इकोनॉमिस्ट कुछ सवाल उठा रहे है तो वास्तव में कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है। सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। पीएम मोदी ने देश के बाहर से काला धन वापस लाने का वादा किया था लेकिन बिल्कुल उलटा हो रहा है। मोदी जी देश के गरीबों का पैसा बैंक में डलवाकर अपने पुंजीपति मित्रों की मदद कर रहे हैं।

प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी का कहना है कि विपक्ष को इस बात से दिक्क्त है कि हमने काले कुबेरों को काले पैसे को ठिकाने लगाने का मौका नहीं दिया।

पीएम मोदी ने ये बात संसद में क्यों नहीं कहा, संसद के बाहर क्यों बोल रहे है। संसद के अंदर बोलने का पीएम मोदी में हिम्मत नहीं है। पीएम डरे हुए है और इसी वजह से नोटबंदी पर केवल संसद के बाहर बयान दे रहे हैं।

आम तौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के स्टैंड अलग होते है लेकिन नोटबंदी के मुद्दे पर दोनों साथ है। क्या कोई इंटर्नल डील हुई है ?

नोटबंदी का विरोध पूरा विपक्ष कर रहा है तो ऐसे में किसी इंटर्नल डील का सवाल ही नहीं उठता। नोटबंदी पर कांग्रेस पार्टी का मानना तृणमूल कांग्रेस और दिल्ली के सीएम से अलग है। वो रोलबैक की मांग कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी कालेधन के खिलाफ उठाए गए हर उचित कदम पर सरकार के साथ है। लेकिन नोटबंदी के बाद जो हालात उपजे हैं कांग्रेस उसका विरोध कर रही है साथ ही जो घोटाले सामने आए है उसके लिए जेपीसी जांच की मांग करती है।

आपको नहीं लगता नोटंबदी पर जो विरोध की राजनीति हो रही है उसमे कांग्रेस पिछड़ती दिख रही है, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल मैदान मारने के चक्कर में है।

कांग्रेस संसद के अंदर और बाहर मेन अपोजिशन पार्टी है। आम आदमी पार्टी का दिल्ली से बाहर कोई जनाधार नहीं है और तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल से बाहर।