आपातकाल में मीडिया की आवाज दबाई गई: मोदी

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने कहा, 'मानवता के लिए कार्य करने में मीडिया और सरकार को एक दूसरे का पूरक होना चाहिए।'

आपातकाल में मीडिया की आवाज दबाई गई: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रेस की आजादी की वकालत करते हुए कहा कि मीडिया पर बाहरी नियंत्रण नहीं होना चाहिए बल्कि उसे आत्मावलोकन करके स्व-नियमन करना चाहिए। मीडिया में सरकार का दखल भी ठीक नहीं है।

पीएम मोदी ने यहां राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर कहा कि मीडिया के क्षेत्र में तेज बदलाव और स्पर्धा के बीच खबरों को उसके वास्तविक अभिप्राय के साथ पेश करना बहुत मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में मीडिया को स्व-नियमन करने के लिए आत्मावलोकन करना चाहिए।

मोदी ने इस संदर्भ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि अनियंत्रित लेखनी बहुत बड़ा संकट पैदा कर सकती है लेकिन मीडिया पर बाहरी नियंत्रण तो तबाही ला सकती है।

पीएम मोदी ने आत्मवलोकन को भी ज़रूरी करार देते हुए कहा कि कंधार कांड और फिर 26/11 की घटना के बाद भी मीडिया के बड़े अनुभवी लोगों ने आत्म अवलोकन किया था। सरकार के सूचना तंत्र को मजबूत करने में भी पीसीआई की भूमिका हो सकती है। क्योंकि सरकार को भी सूचना की जरुरत रहती है।

पीएम मोदी ने कहा कि गलतियों के आधार पर मीडिया का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है। मीडिया को समयानुकूल परिवर्तन और नई पीढ़ी को तैयार करने के लिए स्वयं सोचना होगा। सरकार के सूचना देने के तीस साल पुराने तरीके अब नहीं चल सकते हैं। भारतीय प्रेस परिषद इस स्थिति में बदलाव लाने में सरकार की मदद कर सकती है और इस सरकार में बैठे लोगों को भी इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

मोदी ने सच्चाई का बयान करने वाले मीडियाकर्मियों पर हमले की खबरों पर चिंता जताते हुए कहा कि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की हत्या की खबरें दर्दनाक हैं। वैसे किसी भी व्यक्ति की हत्या गलत है। राज्य सरकारों का यह दायित्व बनता है कि वह इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए।

पीएम न पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाने में मीडिया की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा, 'नेपाल में आए भूकंप के दौरान मीडिया की तत्परता के कारण ही सरकार उसकी तेजी से मदद कर पाई। मानवता के लिए कार्य करने में मीडिया और सरकार को एक दूसरे का पूरक होना चाहिए।'

(फोटो सभार- ANI ट्विटर)