जीके पिल्लै को बनाएं बीसीसीआई का पर्यवेक्षक- लोढ़ा समिति

लोढ़ा समिति ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, 'पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लै को बनाएं बीसीसीआई का पर्यवेक्षक।'

जीके पिल्लै को बनाएं बीसीसीआई का पर्यवेक्षक- लोढ़ा समिति

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड में ठेकों के आवंटन, पारदर्शिता के मानदंडों और भावी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल मैचों के आयोजन समेत इसके विभिन्न प्रशासनिक कार्यो में ‘मार्गदर्शन के लिये पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लै को इसका पर्यवेक्षक नियुक्त करने का अनुरोध करते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

समिति ने 14 नवंबर को कोर्ट में पेश अपनी प्रगति रिपोर्ट में प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ से धनाढ्य बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संगठनों में 70 साल से अधिक आयु सीमा का उल्लंघन करने वाले सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से समाप्त होने की घोषणा का भी अनुरोध किया है।

समिति ने कहा है कि हालांकि, बीसीसीआई का रोजमर्रा का काम इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर रहे हैं और चुनिन्दा प्रबंधक उनकी सहायता कर रहे हैं। लेकिन अब एक पर्यवेक्षक नियुक्त करने की आवश्यकता है जो बीसीसीआई को अपने प्रशासनिक कार्यो, विशेषकर ठेकों के आवंटन, पारदर्शिता के मापदंड, आडिट आदि घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और आईपीएल मैचों के लिए मार्गदर्शन करेगा।

समिति ने अपने सचिव गोपाल शंकरनारायण के माध्यम से दायर रिपोर्ट में पूर्व गृह सचिव जी के पिल्लै को पर्यवेक्षक नियुक्त करने की सिफारिश की है। समिति ने बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संगठनों में पद पर रहने के आधार के संबंध में कोर्ट द्वारा स्वीकृत सिफारिशों का भी हवाला दिया है और कहा कि इसमें सिर्फ भारतीय नागरिक होने चाहिए जिनकी उम्र 70 साल से कम हो।

समिति का कहना है कि ये पदाधिकारी ‘दिवालिया या अस्थिर दिमाग’ वा या मंत्री या सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए। इसमें यह भी शामिल है कि ऐसा व्यक्ति क्रिकेट के अलावा किसी अन्य खेल संगठन या उसके महासंघ में भी कोई पदाधिकारी नहीं होना चाहिए। समिति ने यह भी कहा है कि नौ साल तक पदाधिकारी रह चुका कोई व्यक्ति अयोग्य होगा। इसके अलावा यदि अदालत में किसी व्यक्ति को किसी अपराध करने के आरोप में आरोपित किया जा चुका है वो भी वह अयोग्य होगा।

समिति के अनुसार शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार अयोग्य होने के बावजूद बीसीसीआई और राज्य संगठनों के अनेक पदाधिकारी पदों पर आसीन हैं। समिति ने कहा है कि ऐसे व्यक्तियों को पद पर आसीन रहने के अयोग्य घोषित किया जाये।

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव आदित्य वर्मा ने समिति की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे बिहार जैसे अनेक राज्य लाभान्वित होंगे।