सरकार की साठगांठ 'पूंजीवाद' के साथ, एनपीए पर गुमराह कर रहें वित्त मंत्री: येचुरी

संसद में माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने जेटली के एनपीए पर निष्कर्ष को गलत ठहराते हुए रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों का जिक्र किया।

सरकार की साठगांठ

माकपा  के महासचिव एंव पाेलित ब्यूराे  सीताराम येचुरी ने बीते गुरुवार (17 नवंबर) को वित्त मंत्री अरुण जेटली पर संसद की शीतकालिन सत्र में आराेप लगाते हुए कहा कि सरकार उन 100 लाेगाें का नाम सार्वजनिक क्याें नही कर रही है जाे लाेन लेकर बैठे हुए है और पूरे देश को एसीआरए तथा गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के मुद्दे पर गुमराह कर रही। माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा है कि सरकार ‘साठगांठ के पूंजीवाद को बढ़ावा दे रही है। वहीं पर येचुरी ने आगे कहा कि 500 और 1000 का नोट बंद करने के मुद्दे पर उनकी पार्टी जेपीसी के गठन के लिए एक प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को इस घोषणा से पहले कुछ लोगों को इस बारे में पहले से पता था। उन्होंने एनपीए को बहुत बड़ा घोटाला करार किया। पिछले दो साल में यह दोगुना बढ़ा है और जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को सजा देने का अनुपात कम हुआ है। सरकार साठगांठ के पूंजीवाद में शामिल है।

वहीं पर संसद में बीते बुधवार (16 नवंबर) को जेटली के जवाब पर येचुरी ने कहा कि वित्त मंत्री ने एनपीए पर जो कहा वह गलत था। वित्त मंत्री ने कहा कि बट्टे खाते में डालना कर्ज समाप्त नहीं करना है। यह अभी भी बैंक के खातों में रहेगा और बैंक इसे वसूल करने का प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने जेटली के एनपीए पर निष्कर्ष को गलत ठहराते हुए रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का जिक्र किया। उन्होंने कहा निष्पादित आस्तियों के एनपीए बनने के बारे में रिजर्व बैंक के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं। माकपा नेता ने बुधवार को राज्यसभा में कहा था कि एसबीआई ने अपने एनपीए से 7,000 करोड़ रुपए को बट्टे खाते में डाल दिया है। सरकार पर हमला बोलते हुए येचुरी ने कहा कि पिछले दो साल में 1,12,078 करोड़ रुपए के कर्ज को बट्टे खाते में डाला गया है और वे कह रहे हैं कि इसे अभी भी वसूला जाएगा।