यूएन की माैत की सजा पर बैन के खिलाफ है भारत

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव विरोध करते हुए कहा है कि यह भारतीय वैधानिक कानून तथा अपना कानूनी तंत्र रखने के हर देश के संप्रभु अधिकार के विपरीत है।

यूएन की माैत की सजा पर बैन के खिलाफ है भारत

भारत ने मौत की सजा पर रोक संबंधी संयुक्त राष्ट्र के माैत की सजा पर राेक का एक प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि यह भारतीय वैधानिक कानून तथा अपना कानूनी तंत्र रखने के हर देश के संप्रभु अधिकार के विपरीत है। हालांकि भारत ने उस संशोधन का समर्थन किया है जिसमें घरेलू विधि व्यवस्था विकसित करने के संप्रभु अधिकार की बात की गई है। दुनियाभर में मौत की सजा पर रोक लगाने के संयुक्त राष्ट्र के फैसले का भारत ने विरोध किया है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के मुताबिक फैसले को 115 वोटों के साथ स्वीकृति मिल गई, 38 वोट इसके विरोध में पड़े।

भारत के प्रतिनिधि मयंक जोशी ने मीडिया से बात कर बताया कि हर राष्ट्र को अपने नियम-कानून बनाने का अधिकार है। सजा पर रोक का फैसला उस संप्रभुता का उल्लंघन होगा। जोशी ने बताया कि भारत में मौत की सजा “दुर्लभ से दुर्लभतम’ अपराध के आधार पर ही दी जाती है। उन्होंने बताया कि भारत ने घरेलू कानून प्रणाली विकसित करने के अधिकार पर संशोधन के बिल को समर्थन दिया है।

दूसरी तरफ, भारत के संयुक्त मिशन में काउंसलर ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है ‘क्योंकि यह भारत के वैधानिक कानून के विपरीत है।’ बहरहाल, इस प्रस्ताव को 38 के मुकाबले 115 मतों से पारित कर दिया गया। ‘गहन चर्चा’ के बाद 31 देश मतदान से अनुपस्थित रहे। संशोधन के पक्ष में 76 मत पड़े, जबकि विरोध में 72 देशों ने मतदान किया। 26 सदस्य अनुपस्थित रहे। इन मुद्दों पर भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए जोशी ने कहा, ‘भारत में मौत की सजा ऐसे दुलर्भतम मामलों में दी जाती है, जहां अपराध इतना जघन्य हो कि समाज की अंतरात्मा हिल जाए।’