मर्चेंट नेवी की पहली महिला कैप्टन को मिला अंतरराष्‍ट्रीय बहादुरी पुरूस्कार

भारत की पहली महिला मर्चेंट नेवी कैप्टन राधिका मेनन को पिछले साल अशांत बंगाल की खाड़ी से सात मछुआरों की जान बचाने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय बहादुरी पुरूस्कार दिया गया...

मर्चेंट नेवी की पहली महिला कैप्टन को मिला अंतरराष्‍ट्रीय बहादुरी पुरूस्कार

ये तो सच है कि महलाएं किसी से  कम नहीं होती। अगर उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया जाए तो वो पुरूषों को भी पिछे छोड़ सकती हैं। ना जाने कितनी ऐसी मिसालें हमारे सामने आई हैं। जिन महिलाओं ने अपने हुनर और साहस से पुरूषों को पिछे छोड़ अपनी एक अलग पहचान बनाई है। ऐसी ही एक मिसाल है राधिका मेनन जिनको आईएमओ के पुरूस्कार से सम्मानित किया गया।

दरासल राधिका भारत की पहली महिला मर्चेंट नेवी कैप्टन हैं। जिन्होंने पिछले साल अशांत बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने वाली एक नौका से सात मछुआरों को नाटकीय ढंग से बचाने में अपनी असाधारण बहादुरी दिखाई और जिसके कारण  उनको आईएमओ के पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया इस पुरूस्कार से सम्मानित होने वाली ये पहली महिला हैं। कैप्टन राधिका मेनन ने यहां अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के मुख्यालय में पुरस्कार समारोह में अपना पदक और प्रमाणपत्र ग्रहण किया।

बता दें कि पुरस्कार ग्रहण करने के बाद मेनन का कहना है कि मैं ये पुरूस्कार अपने और अपनी टीम के लिए इस सम्मान से मैं गौरवान्वित और विनीत महूसस करती हूं। मुश्किल में फंसे लोगों की मदद करना नाविक का कर्तव्य है और मैंने अपना कर्तव्य पूरा किया। नाविक का काम एक महान पेशा है जो विश्व व्यापार, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक एकीकरण में भारी योगदान देता है।  यह पहचान का हकदार है लेकिन उसे हमेशा यह मिल नहीं पाता।

वहीं मेनन आईएमओ समुद्र असाधारण बहादुरी पुरस्कार ग्रहण करने वाली पहली महिला हैं जिन्हें भारत सरकार ने नामित किया था। यह पुरस्कार उन लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर प्रदान किया जाता है जो अपनी जान की बाजी लगाकर असाधारण बहादुरी दिखाते हैं।

उनका पुरस्कार जून, 2015 में दुर्गम्मा नौका के सात मछुआरों को सफलतापूर्वक बचाने से संबंधित है। खराब मौसम में इंजन खराब होने जाने नौका भटक गई थी। यह नौका ओड़िशा में गोपालपुर के तट से करीब ढाई किलोमीटर दूर शिपिंग कोरपोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज संपूर्ण स्वराज को दिखी थी जिसकी प्रभारी मेनन थी। मेनन ने बचाव अभियान का आदेश दिया था।