क्या जनरल बाजवा के लिए भारत सबसे बड़ा दुश्मन है?

भारत के प्रति बाजवा का रवैया क्या उतना ही दुश्मनी भरा होगा जितना जनरल शरीफ का था? जानकारों का मानना है कि यह जानने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा

क्या जनरल बाजवा के लिए भारत सबसे बड़ा दुश्मन है?

किसी भी देश के आर्मी चीफ भले ही बदल जाए चाहे वाे भारत का हाे या पाकिस्तान का हाे, लेकिन भारत के प्रति पाकिस्तानी आर्मी की गहरी दुश्मनी कभी नहीं बदलती। जनरल कमर जावेद बाजवा को राहील शरीफ की जगह पाकिस्तान का नया आर्मी चीफ बनाया गया है। ऐसे में सबकी निगाह इस बात पर है कि भारत के प्रति बाजवा का रवैया क्या उतना ही दुश्मनी भरा होगा जितना जनरल शरीफ का था? जानकारों का मानना है कि यह जानने के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा।

इस मामले पर पाकिस्तान के एक टॉप अफसर ने मीडिया से कहा कि, 'जनरन बाजवा एलओसी के पूरे इलाके की जटिलताओं और यहां चलाए जाने वाले ऑपरेशन्स की बारीक की समझ रखते हैं। अपने करियर में उन्होंने कश्मीर को काफी गहराई से देखा और समझा है, पर अभी कुछ भी कहना दरअसल जल्दबाजी होगा। जनरल परवेज मुशर्रफ और कयानी के बारे में भी जैसा शुरुआत में कहा गया था, उन्होंने वैसा नहीं किया।'

 पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने अलग-अलग कार्यकाल में छह आर्मी चीफ चुन चुके हैं। उन्होंने ही जनरल परवेज मुशर्रफ को 1998 में चुना था। एक साल बाद में मुशर्रफ ने उनका तख्तापलट कर दिया और उन्हें सउदी अरब जाना पड़ा। नवाज शरीफ की राहील शरीफ से भी कुछ खास नहीं बनी, जिन्हें 2013 में खुद उन्होंने ही चुना था। ऐसे में नवाज शरीफ को भी जनरल बाजवा से काफी उम्मीदें होंगी।


खुद को पाकिस्तान के महान रक्षक की तरह पेश करने वाले जनरल शरीफ ने देश में ही पैदा हुए आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। उनकी छवि भारत के प्रति कट्टर दुश्मनी रखने वाली भी थी। शायद इसकी वजह यह भी थी कि भारत के साथ 1965 की लड़ाई में उनके अंकल और 1971 के युद्ध में उनके भाई मारे गए थे।



भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह का भी मानना है कि बाजवा के रुख को ठीक तरह समझने के लिए अभी इंतजार करना होगा। 2007 में कांगो में संयुक्त राष्ट्र के मिशन में जनरल बाजवा ने ब्रिगेड कमांडर के तौर पर जनरल बिक्रम सिंह के मातहत काम किया था।

जनरल सिंह ने कहा, 'यूएन मिशन में जनरल बाजवा का काम पूरी तरह प्रफेशनल और शानदार था, पर अंतरराष्ट्रीय माहौल में एक अफसर का व्यवहार अलग होता है और अपने देश में अलग। देश में उन्हें राष्ट्रीय हितों के हिसाब से काम करना पड़ता है।'


 जनरल सिंह के मुताबिक, 'जनरल बाजवा 10वीं कोर के कमांडर रह चुके हैं, जो वहां की सबसे बड़ी कोर है। उन्हें भारत के प्रति अपने देश की नीति के बारे में बहुत अच्छे से जानकारी है। मुझे लगता है कि जहां तक पाकिस्तानी आर्मी की कश्मीर नीति का सवाल है, तो उसमें कोई बदलाव नहीं आने वाला।'



दक्षिण एशिया के कई अंतरराष्ट्रीय जानकारों का भी यही मानना है। जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय की असोसिएट प्रफेसर सी क्रिस्टीन के मुताबिक बाजवा के आर्मी चीफ बनने से कुछ नहीं बदलने वाला। भारत का भी यही मानना है कि पाकिस्तानी आर्मी का रवैया न तो भारत के प्रति बदलने वाला है और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने की पाकिस्तान की नीति में भी कोई परिवर्तन आएगा।