मायावती के ब्राह्मण प्रेम के मायने क्या है ?

बसपा के इस ब्राह्मण प्रेम के पीछे यह सोच हो सकती है कि 21 फीसदी दलित और 11 फीसदी ब्राह्मण को जोड़ कर सत्ता तक पहुँचना आसान हो पाए । 2007 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में बसपा ने 90 ब्राह्मण और 88 दलितों को टिकट दी थी और कामयाबी भी मिली थी ।

मायावती के ब्राह्मण प्रेम के मायने क्या है ?

उत्तर प्रदेश की चुनावी महाभारत और ज़्यादा दिलचस्प होती जा रही  है। करीब 2200 साल पहले लिखा गया था कि शूद्र ब्राह्मण का दास बनने के लिए ही पैदा हुआ है। फिर 1930 में बाबा साहेब अंबेडकर को नासिक के एक मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया। फिर समय का चक्र थोड़ा घूमा और उसी मंदिर के पुजारी का पोता बसपा में शामिल हो गया। और अब मायावती 85 सुरक्षित सीटों पर ब्राह्मण सम्मेलन कर रही है और नारे लग रहे हैं, “हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्ममा विष्णु महेश है”

पार्टी के दूसरे बड़े नेता सतीश मिश्रा ने भी कानपुर मे ब्राह्मण सम्मेलन किया । यह सम्मेलन दलितों के मंच पर राम भक्त हनुमान की तस्वीर के साथ हुआ।  ब्राह्मण समाज के लिए एक अलग मंच भी बनाया गया जहाँ से समय समय पर शंख ध्वनि होती रही।

ब्राह्माणवाद से जंग का एलान कर बनी बसपा ने 2007 में पहली बार विधान सभा के चुनाव के दौरान सोशल एंजीनेरिंग का फार्मूला पेश किया था जिसमे समाज के सभी तबकों को साथ आने को कहा था और यही फार्मूला उनके टिकट वितरण करने की प्रक्रिया में भी दिखा था।

ब्राह्मण प्रेम के पीछ ये सोच है

बसपा के इस ब्राह्मण प्रेम के पीछे यह सोच हो सकती है कि 21 फीसदी दलित और 11 फीसदी ब्राह्मण को जोड़ कर सत्ता तक पहुँचना आसान हो पाए । 2007  के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में बसपा ने  90 ब्राह्मण और 88 दलितों को टिकट दी थी और कामयाबी भी मिली थी । 403  में से 206  सीट जीत कर बसपा ने सत्ता हासिल की थी। उसी समय मायावती ने सवर्णों को भी आर्थिक आधार पर आरक्षण देने कि बात की थी।  पर उसके बाद जब अगले चुनाव में अखिलेश को ब्राह्मण वोट ज़्यादा मिला तब से बसपा का ब्राह्मणों को टिकट देने का सिलसिला कम हो गया। 2012 में  में बसपा ने 74  ब्राह्मण, 88 दलित और 85  मुस्लिम को टिकट दिया था ।

2017 चुनाव के लिए ये है प्लान

आगामी 2017 चुनाव की तैयारी की बात करे तो अभी तक बसपा ने 34 ब्राह्मण, 86 दलित और 100  मुसलमानों को टिकट दिया है।  क्या इस बार बसपा मुस्लिम और दलित सम्मिश्रण के साथ चुनाव में उतरना चाहती है? यह तो वक्त ही बताएगा मायावती फिलहाल सबको लुभाने मे लगी है, उनको लग रहा है कि उनका दलित वोट तो पक्का है और साथ में मुसलमान या ब्राह्मण कोई भी आ जाए तो वह सत्ता तक आसानी से पहुँच जाएंगी l