मोरक्को जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का हुआ समापन

मोरक्को जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का समापन शुक्रवार को हुआ, 2018 तक बनेंगे पेरिस समझौते के कायदे....

मोरक्को जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का हुआ समापन

मोरक्को में आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का शुक्रवार देर रात समापन हुआ। सम्मेलन को इस वादे के साथ समाप्त किया गया- पेरिस समझौते को लागू करने के लिए कायदे 2018 तक बना लिये जायेंगे और इसमें पारदर्शिता बरती जायेगी। आपको बता दें, पेरिस डील इसी साल 4 नवंबर को लागू हुई है जिसके तहत धरती को गर्म होने से रोकने के लिए सभी देशों को कदम उठाने हैं।

वहीं, भारत ने विकसित देशों से दोहा समझौते को लागू कर तुरंत अपने कार्बन उत्सर्जन कम करने को भी कहा है। दरअसल सात साल पहले कोपनहेगन में सभी देशों ने धरती का तापमान 1.5 डिग्री से अधिक न बढ़ने देने के लिए कदम उठाने की बात की थी लेकिन अब तक कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए कोई बड़े प्रयास नहीं किए गये। इसलिए भारत ने इस सम्मेलन में अमीर देशों से अपील की है वे अपने कार्बन उत्सर्जन कम करें और इस बात पर चिंता जताई कि विकासशील देशों की मदद के लिये बनाये जा रहे ग्रीन क्लाइमेट फंड में विकसित देशों ने कोई रकम जमा नहीं की है।

सम्मेलन के दौरान ही विश्व मौसम संगठन की रिपोर्ट ने चिंताएं और बढ़ा दी जिसकी ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक इस बात की 90 प्रतिशत संभावना है कि ये साल पिछले साल का रिकॉर्ड भी तोड़ देगा और अब तक का सबसे गरम साल होगा।

इस मामले पर भारत के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री अनिल दवे ने भी सम्मेलन में दिए अपने भाषण में कहा था कि 'संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के तहत 2020 से पहले और उसके बाद दिए जाने वाले क्लाइमेट फाइनेंस को लेकर विकासशील देशों में चिंता बनी हुई है.' बता दें कि पेरिस समझौते के तहत एक ग्रीन क्लाइमेट फंड बनना है, जिसकी मदद से हर साल गरीब और विकासशील देशों को 100 बिलियन डॉलर दिए जाने हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि इस फंड में अभी नाममात्र का पैसा जमा हुआ है.