शादी में ढाई लाख रूपए निकालने वाली याचिका को कोर्ट ने किया खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें शादी के लिए सिर्फ ढाई लाख रुपए तक निकालने की सीमा में ढील देने का आग्रह किया गया था...

शादी में ढाई लाख रूपए निकालने वाली याचिका को कोर्ट ने किया खारिज

नोटबंदी के बाद सरकार ने शादी में पैसे निकालने के लिए एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था की  शादी के लिए सिर्फ ढाई लाख रूपए तक ही निकाले जा सकते हैं और वह भी शादी का कार्ड दिखाकर लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज उस याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल ने कहा कि रिट याचिका खारिज की जाती है।’’  याचिका में नकदी सीमा में ढील देने के साथ ही इन ब्योरों को भी पेश करने के मार्गनिर्देश को ‘‘मनमाना’’ करार दिया गया था जिसमें उन लोगों की विस्तृत सूची मांगी गई है जिन्हें शादी के लिए निकाली गई रकम विभिन्न मद में दी जानी है और साथ ही इन मद में रकम पाने वाले से एक घोषणा भी देने के लिए कहा गया है कि उनके पास बैंक खाता नहीं है।

बता दें कि उच्च न्यायालय ने 28 नवंबर को इसपर अपना फैसला यह कहते हुए सुरक्षित कर लिया था कि नोटबंदी के मुद्दे पर जहां भी जरुरत महसूस हुई सरकार ने ‘‘ढिलाई’’ बरती है।  इससे पहले, केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल संजय जैन ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया था कि सरकार ने पहले ही कुछ छूट दे दी है लेकिन कुछ शर्तें जरुरी हैं ताकि कोई उसका दुरुपयोग नहीं करे।  अपनी याचिका में याचिकाकर्ता बिरेंदर सांगवान ने कहा था कि शादियों के लिए ढाई लाख रुपए की निकासी की अधिकतम सीमा में ढिलाई दी जाए क्योंकि शादी के समारोह में विभिन्न प्रकार के ‘‘पारंपरिक शगुन’’ दिए जाते हैं और कई प्रकार के खर्च होते हैं जिनके लिए ज्यादा से ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ती है।

गौरतलब है कि याचिका में कहा गया था कि शादियों के लिए छूट दी जानी चाहिए ताकि कोई परंपरा के अनुरूप शगुन दे सके। कैसे कोई इस तरह का हलफनामा दे सकता है? दिशानिर्देश के अनुसार, शादी कराने वाले पंडित को भी हलफनामा देना पड़ेगा कि उसके पास कोई बैंक खाता नहीं है। वर और वधु के मां-बाप को इस तरह की मनमानी शर्तों के बिना अपने खाते से धन निकालने की इजाजत मिलनी चाहिए।