विचाराधीन कैदी, कैसे आतंकवादी हाे सकते हैं?

भाेपाल में एनकाउंटर में मारे गए विचाराधीन क़ैदियों काे अातंकवादी बता कर माैत के घाट उतार दिया गया।

विचाराधीन कैदी, कैसे आतंकवादी हाे सकते हैं?

भोपाल के सेन्ट्रल जेल से फरार हुए 8 प्रतिबंधित सिमी (स्टूडेन्ट इस्लामिक मूवमेंट आफॅ इडिंया) के विचाराधीन क़ैदियों को बीते सोमवार को भोपाल पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मार दिया गया।

बताया जा रहा है कि सिमी से जुड़े इन 8 विचाराधीन क़ैदियों ने एक सुरक्षाकर्मी की हत्या की और फिर जेल की दीवार फांदकर भाग गए। लेकिन जिस तरह से भोपाल पुलिस लंबी चौडी हांक कर अपनी पीठ थपथपा रही है वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके मंत्री इस वारदात को एक बहुत बड़ी सफलता के तौर पर देख रहे हैं।

लेकिन यह एनकाउंटर एक विवाद में तब्दील हो गया है और सत्तारूढ़ भाजपा पर विपक्षी दलों ने चारों तरफ से हमला कर दिया है।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम के असद्दुदीन ओवैसी ने इस एनकाउंटर पर सवाल खड़ा करते हुए जांच की मांग की है। वहीं पर माकपा पोलित ब्यूरो वृंदा करात ने इस एनकाउंटर को संदेहजनक और संदिग्ध बताया है और इसकी न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि वो कैदी विचाराधीन थे तो फिर कैसे उनको सरकार आतंकवादी घोषित कर सकती है।

जहां इस एनकाउंटर को अंजाम दिया गया वहां के रहने वाले एक शख़्स प्रवीण दुबे ने एनकांउटर का वीडियो भी बनाया था। उस वीडियो की मदद से यह पता चला कि पुलिस नजदीक से उन क़ैदियों पर गोली चला रही थी और उनके मरने के बाद भी पुलिस वाले उन पर ताबड़तोड़ गोली चलाते रहे। जबकि मौक़े पर उन विचाराधीन क़ैदियों के पास से कोई बंदूक या फिर कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है।

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मौक़ा ए वारदात पर चश्मदीद प्रवीण कुमार ने उस एनकांउटर का वीडियो बनाया और उसे फेसबुक पर पोस्ट कर दिया। इस वीडियो को देखकर साफ कहा जा सकता है कि पुलिस ने जिस एनकाउंटर में 8 विचाराधीन क़ैदियों को मौत के घाट उतारा, वह एनकाउंटर फर्जी था।

भोपाल पुलिस के द्वारा अंजाम दिए गए इस एनकाउंटर पर सवाल कई खड़े हो रहे हैं...

1- बीते रविवार रात करीब 12 बजे के आस पास सेन्ट्रल जेल से कैदी फरार होते है और उनका एनकाउंटर दिन के 11 बजे होता है। अगर उनका मक़सद किसी घटना को अंजाम देना था तो 12 घंटे काफी होते है किसी पेशेवर अपराधी के पास भागने के लिए ?

2- मध्य प्रदेश के गृहमंत्री का वो बयान जिसमें उन्होंने कहा कि उन विचाराधीन कैदी के हाथों में चम्मच और थाली थी। जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने बचाव के लिए किया। सवाल यह कि क्या चम्मच-थाली, बंदूक या किसी और हथियार से ज़्यादा घातक हो सकते हैं ?

3- इन कैदियों का एनकाउंटर देखा जाए तो पता चलता है कि उनके पास कोई बंदूक नहीं थी, उन कैदियों ने जींस पेंट, शर्ट, जूते पहने हुए थे तो सवाल यह कि क्या किसी कुख़्यात आतंकी को जेल प्रशासन पहनने-ओढ़ने की वो तमाम चीज़े मुहैया कराता है जो एक सामान्य इंसान पहनता है और क्या किसी क़ैदी की अगर जेल से फरारी होती है तो क्या उसके पास जींस - जूते पहनने का वक़्त होगा ?

4- जिस स्थान पर एनकाउंटर हुआ, वहां पर गहरी खाई होने की वजह से कैदी भाग ही नहीं सकते थे । अगर वो भागने की कोशिश भी करते तो खाई में गिर जाते।

5- जेल के अंदर का कोई सीसीटीवी फुटेज अभी तक नहीं मिला है कि कैदी कहां से और कैसे इस आईएसओ प्रामाणित जेल से फरार हुए ? मौके पर उस सुरक्षाकर्मी की कहां तैनाती थी और कैसे उसकी हत्या की गई ?

6- सबसे अहम सवाल यह भी कि इन विचाराधीन कैदियों को अलग- अलग सेल में रखा गया था फिर भी वे 8 साथ-साथ कैसे फरार हो गए ?

7- क़ानून की भाषा तो यह भी कहती है कि किसी क़ैदी का अगर ट्रायल चल रहा है और उसका जुर्म भी साबित नहीं हुआ था फिर वो कैसे आतंकवादी हो सकता है। साफ शब्दों में अगर अदालत ने आरोपी को दोषी क़रार नहीं दिया तो कैसे उनको आतंकी के नाम से पुकारा जा सकता है।

8- इस एनकाउंटर में पुलिस ने विचाराधीन कैदियाें काे ज़िन्दा क्य़ाे नही पकडा या क्यों सरेंडर कराने के बजाय सीधे मार दिया? क्या ये सभी क़ैदी किसी खतरनाक वारदात काे अंजाम देने जा रहे थे । क्या ऐसे हालात में इनको गोली मार देना ही पुलिस के लिए मुनासिब था।

कुल मिलाकर यह एक संदेहजनक एनकाउंटर है जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए क्योंकि काफी आसान काम होता है किसी को मार देना और उस पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगा देना। यह एक पूर्व नियोजित कार्रवाई थी जिसको भोपाल पुलिस ने बड़ी ही सफाई के साथ अंजाम देने की कोशिश की लेकिन फंस गई।

(पाेस्ट साभार- प्रवीण दुबे,फेसबुक वॉल)