सुब्बाराव ने नोटबंदी को बताया 'फायदेमंद'

आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा कि थोड़े समय के लिए भले ही नोटबंदी से समस्या हो। लेकिन, कुछ समय बाद इसके फायदे दिख सकते हैं।

सुब्बाराव ने नोटबंदी को बताया

8 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए गए नोटबंदी की घोषणा को लेकर बहस जारी है। 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा करते हुए पीएम ने कहा कि इससे कालेधन पर अंकुश लगेगा और आतंकवादियों को मिलने वाले पैसे पर भी लगाम लगेगी।

जहां कई विपक्षी पार्टियां नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना कर रही हैं तो कुछ पार्टियां नोटबंदी का समर्थन करने के बावजूद उसके बाद के हालात से निपटने की सरकार की तैयारी को लेकर हमलावर मुद्रा में हैं।

उधर आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने नोटबंदी को कालेधन पर लगाम लगाने में बेअसर बताया तो आरबीई के एक अन्य पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने इसे बेहतर फैसला बताया है।

सुब्बाराव के अनुसार नोटबंदी के ये फायदे हो सकते हैं।

सुब्बाराव के अनुसार नोटबंदी से बैंकों की ब्याज दर कम हो सकती है। आरबीआई द्वारा कोई नई राहत दिए बिना भी इस फैसले की वजह से बैंंकों का कॉस्ट ऑफ फंड कम होगा जिससे वो लोन पर ब्याज दर कम कर सकते हैं। और अगर बैंक लोन पर ब्याज की दर कम करेंगे तो अर्थव्यवस्था में ज्यादा निवेश होगा।

सुब्बाराव ने कहा है कि ‘रियल एस्टेट’ में सबसे ज्यादा कालाधन लगा हुआ है। नोटबंदी से इस सेक्टर पर काफी असर पड़ सकता है। सुब्बाराव मानते हैं कि नोटबंदी के बाद नकद कालाधन के खात्मे के बाद जमीन-मकान इत्यादि की कीमतों और किराए में कमी आ सकती है।

कालेधन का अर्थ है वो पैसा जिसके बारे में आयकर विभाग को जानकारी न दी गई हो। यानी कालाधन ऐसा पैसा है जिस पर इनकम टैक्स नहीं चुकाया गया है। सुब्बाराव मानते हैं कि नोटबंदी के बाद अघोषित आय पर लगाए गए टैक्स और जुर्माने से सरकारी खजाने में बड़ी राशि आ सकती है।

सुब्बाराव मानते हैं कि थोड़े समय के लिए भले ही नोटबंदी से समस्या हो लेकिन, थोड़े समय बाद इसके फायदे दिख सकते हैं। नोटबंदी से अर्थव्यवस्था की एक तरह से सफाई भी होगी जिससे बचत और निवेश पर सकारात्मक असर पड़ेगा। अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आने से कारोबारी सहूलियत बढ़ेगी। निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा। इससे भारत की उत्पादन क्षमता भी बढ़ सकती है।