सउदी अरब: मानवाधिकार कार्यकर्ता को ट्वीट करने पर हुई 2 साल की जेल

सउदी अरब ने एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को ट्विटर पर देश में सत्ताधारी अल सऊद परिवार के खिलाफ बगावत को बढ़ावा देने और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग करने के लिए दो साल की सजा सुनाई है।

सउदी अरब: मानवाधिकार कार्यकर्ता को ट्वीट करने पर हुई 2 साल की जेल

सउदी अरब ने एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को ट्विटर पर देश में सत्ताधारी अल सऊद परिवार के खिलाफ बगावत को बढ़ावा देने और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग करने के लिए दो साल की सजा सुनाई है। मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक इस अज्ञात व्यक्ति को बुधवार 16 दिसंबर को रियाद स्थित विशेष अपराध अदालत में सजा सुनाई गई।

इस मानवाधिकार कार्यकर्ता पर ट्विटर पर अकाउंट बनाने और ट्वीट का इस्तेमाल कर सऊदी शासन के खिलाफ लोगों को लामबंद करने का आरोप है। वहीं कार्यकर्ता पर राजनीतिक बंदियों को रिहा करने के लिए दंगा भड़काने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है। सउदी शासन के अनुसार मानवाधिकार कार्यकर्ता ने ट्विटर का इस्तेमाल सऊदी अरब के शाह सलमान और सुरक्षा बलों पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए भी किया। इससे पहले भी सऊदी अरब में सोशल मीडिया पर शासन की आलोचना के लिए कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेल की सजा दी जा चुकी है।

सउदी शासन पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगातार लगते रहे हैं। अमेरिकी मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट वाच और ब्रिटेन स्थित मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी ने राजनीतिक विरोधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के दमन के लिए सऊदी प्रशासन की आलोचना की है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार सउदी प्रशासन की न्यायप्रक्रिया भी भेदभावपूर्ण है। सउदी कानून के अनुसार सऊदी के शाह का अपमान करने और सामाजिक शांति भंग करने के लिए 10 साल तक की सजा दी जा सकती है।

गौरतलब है कि जुलाई 2014 में सउदी अदालत ने प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता वालिद अबु अल-खैर को 15 साल जेल की सजा सुनाई थी। उन पर सजा पूरी होने के पांच साल बाद तक विदेश जाने पर पाबंदी भी रहेगी। इसके अलावा उन्हें दो लाख सऊदी रियाल करीब 36 लाख रुपये जुर्माना भी चुकाना पड़ा। अल-खैर ने सउदी अरब स्थित मानवाधिकार संस्था मॉनिटर ऑफ ह्यूमन के संस्थापक हैं।