जापानी ग्राहकों को आकर्षित करने, स्केटिंग रिंक में सजावट के लिए मछलियां जमा देने पर बवाल

ग्राहकों को आकर्षित करने की खातिर सजावट के नाम पर 5,000 मरी हुई मछलियों को बर्फ के नीचे जमा देने वाले जापानी स्केटिंग रिंक कंपनी को कड़ी आलोचनाओं के बाद बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा है

जापानी ग्राहकों को आकर्षित करने, स्केटिंग रिंक में सजावट के लिए मछलियां जमा देने पर बवाल

अपने ग्राहकों को आकर्षित करने की खातिर सजावट के नाम पर 5,000 मरी हुई मछलियों को बर्फ के नीचे जमा देने वाले जापानी स्केटिंग रिंक कंपनी को कड़ी आलोचनाओं के बाद बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

वहीं पर इस मामले काे लेकर सोशल मीडिया पर  लोग काफी गुस्से में दिखे। एम्यूज़मेंट पार्क के फेसबुक पेज पर एक सज्जन ने लिखा, "आइस रिंक में जमी हुई मछलियां... कितना बड़ा गुनाह है..."

एक अन्य विज़िटर ने लिखा, "यह व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक मुद्दा है... उन्होंने भोजन को खिलौना बना डाला है, जहां बच्चे जाते और खेलते हैं..."

शिबाता ने हालांकि कहा कि जिस समय इन मछलियों को खरीदा गया था, वे मरी हुई थीं, और बाज़ार में भोजन के रूप में बेचे जाने के योग्य नहीं थीं.

उन्होंने कहा, इस सेट-अप को बनाने से पहले "हमने इस आइडिया की नैतिकता को लेकर अंदरूनी तौर पर चर्चा भी की थी..."

स्पेस वर्ल्ड के जनरल मैनेजर तोशिमी ताकेदा ने कहा कि हमारी मंशा ती कि ग्राहक आनंदित हों, और साथ ही मछलियों के बारे में सीखें भी. उन्होंने कहा, "हम चाहते थे कि ग्राहकों को समुद्र पर स्केटिंग करने का एहसास मिले, लेकिन आलोचना के बाद हमने तय किया कि अब हम इसे और नहीं चला सकते  कंपनी ने कहा कि एम्यूज़मेंट पार्क 'स्पेस वर्ल्ड' अब इस रिंक को पिघला रहा है, जिसमें लगभग एक हफ्ता लग जाएगा, और फिर वह इन मछलियों के लिए स्मृति सभा (मेमोरियल सर्विस) का आयोजन करेगी।

बतादे कि दक्षिण-पश्चिमी जापान में स्थित इस रिंक का उद्घाटन 12 नवंबर को हुआ था, जिससे पहले इसमें इस्तेमाल हुई बर्फ की सतह के नीचे सजावट के उद्देश्य से 5,000 मछलियों को जमाया गया था, और ऊपर ग्राहकों को स्केटिंग करनी थी।

स्पेस वर्ल्ड के प्रवक्ता कोजी शिबाता ने मीडिया काे बताया, किताक्यूशू शहर में बने इस रिंक के इस आइडिया की शुरुआत से ही कड़ी आलोचना हुई, और इसे अनैतिक कहा गया। आलोचना इतनी ज़्यादा की गई कि रविवार को रिंक को बंद कर देना पड़ा।

कोजी शिबाता ने आगे  बताया की, "हमें इसे लेकर आलोचनात्मक स्वरों का सामना करना पड़ा, जिनमें कहा गया कि प्राणियों को खिलौनों की तरह इस्तेमाल किया जाना अच्छी बात नहीं है, और इसक अलावा यह भी कहा गया कि भोजन को यूं व्यर्थ किया जाना भी बुरी बात है..."