भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की 132वीं जयंती आज

देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज 132 वीं जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है....

भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की 132वीं जयंती आज

बिहार की पावन भूमि पर जन्मे देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आज 132 वीं जयंती है। उनके जन्मस्थान सीवान के जीरादेई के अलावा पूरे देश में उनकी जयंती मनाई जा रही है. वर्ष 1962 में अवकाश प्राप्त करने के बाद उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म वर्ष 1884 में सीवान के जीरादेई की धरती पर हुआ था. उनका जीवन हमेशा सादगी और जनता के प्रति सार्थक सोच को लेकर समर्पित रहा. बुजुर्ग होने पर भी उन्होंने आम जनता से अपना निजी संपर्क कायम रखा और सामान्य लोगों से मिलते हुए गुजरा.

राजेन्द्र बाबू के पिता महादेव सहाय संसकृत एवं फारसी के विद्वान थे एवं उनकी माता कमलेश्वरी देवी एक धर्मपरायण महिला थीं। पाँच वर्ष की उम्र में ही राजेन्द्र बाबू ने एक मौलवी साहब से फारसी में शिक्षा शुरू किया। उसके बाद वे अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए छपरा के जिला स्कूल गए। राजेंद्र बाबू का विवाह उस समय की परिपाटी के अनुसार बाल्य काल में ही, लगभग 13 वर्ष की उम्र में, राजवंशी देवी से हो गया। विवाह के बाद भी उन्होंने पटना की टी० के० घोष अकादमी से अपनी पढाई जारी रखी। उनका वैवाहिक जीवन बहुत सुखी रहा और उससे उनके अध्ययन अथवा अन्य कार्यों में कोई रुकावट नहीं पड़ी।

लेकिन वे जल्द ही जिला स्कूल छपरा चले गये और वहीं से 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय  की प्रवेश परीक्षा दी। उस प्रवेश परीक्षा में उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। सन् 1902 में उन्होंने कोल के प्रसिद्ध  में दाखिला लिया। उनकी प्रतिभा ने गोपाल कृष्ण गोखले,  जैसे विद्वानों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 1915 में उन्होंने स्वर्ण पद के साथ विधि परास्नातक (एलएलएम) की परीक्षा पास की और बाद में लॉ के क्षेत्र में ही उन्होंने डॉक्ट्रेट की उपाधि भी हासिल की। राजेन्द्र बाबू कानून की अपनी पढाई भागलपुर का अभ्या में किया करते थे।

अपने जीवन के आखिरी महीने को बिताने के लिये उन्होंने पटना का सदाकत आश्रम चुना जो आज की तारीख में कांग्रेस का बिहार प्रदेश मुख्यालय है. 28 फरवरी 1963 में उनके जीवन की कहानी समाप्त हुई. यह एक ऐसी कहानी थी जिसपर पूरा देश आज भी गर्व करता है. उन्होंने अपने जीवन में श्रेष्ठ भारतीय मूल्यों और परंपरा को कायम रखा. आज भी उनका जीवन राष्ट्र को प्रेरणा देता है और देता रहेगा.