भाेपाल गैस त्रासदी की 32वीं बरसी आज, 3,700 लोगों ने गवाईं थी जान

भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड प्लांट से टनों एमआईसी गैस का रिसाव हुआ जिसने हज़ारों को मौत की नींद सुला दिया था। दम घुटने और हार्ट अटैक से हजारों मौतें हुई थी, और कितने ही लोग आज भी सांस की बीमारियों, अंधेपन और कैंसर से जूझ रहे हैं।

भाेपाल गैस त्रासदी की 32वीं बरसी आज, 3,700 लोगों ने गवाईं थी जान

आज से ठीक 32 साल पहले 2 दिसंबर की वो मनहूस काली रात जिसे भारत और भोपाल वासी शायद ही कभी भुला पाएंगे। जिसने चंद घंटों में ही उनकी खुशियां छीन ली थी। किसी का सुहाग उजड़ा, तो किसी की गोद सूनी हो गई, किसी के सिर से मां-बाप का साया हमेशा के लिए उठ गया तो किसी की हंसती खेलती जिंदगी तबाह हो गई। यहां तक की किसी का तो पूरा का पूरा परिवार ही तबाह हो गया।

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इस काली रात काे भारत और दुनिया के इतिहास में हजारों मौतों और बीमारियों के एक लंबे सिलसिले की शुरुआत के बतौर याद की जाती है। ऐसी रात जब भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड प्लांट से टनों मिथाइल आइसोसाइनेट(एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ जिसने हज़ारों लोगों को मौत की नींद सुला दिया। दम घुटने और हार्ट अटैक से हजारों मौतें हुई और कितने ही लोग आज भी सांस की बीमारियों, अंधेपन और कैंसर से जूझ रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस हादसे में कुल 3,700 की मौत हुईं। वहीं, कई एनजीओ ने दावा किया था कि मौत का आंकड़ा 10 से 15 हजार के बीच था। गैस से करीब 5,58,125 लोग प्रभावित हुए थे। इनमें से करीब 4000 लोग ऐसे थे जो गैस के प्रभाव से परमानेंट डिसेबल हो गए थे जबकि 38,478 लोगों को सांस से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।

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गौरतलब है कि 2 दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात गैस त्रासदी हुई। यूनियन कार्बाइड कारखाने के 610 नंबर के टैंक में खतरनाक मिथाइल आइसोसाइनाइट रसायन था। टैंक में पानी पहुंच गया। तापमान 200 डिग्री तक पहुंच गया। धमाके के साथ टैंक का सेफ्टी वाल्व उड़ गया। उस समय 42 टन जहरीली गैस का रिसाव हुआ था।

दिसंबर 1984 में हुआ भोपाल गैस कांड दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी थी। उस वक्त एंडरसन यूनियन कार्बाइड का प्रमुख था। उसे घटना के चार दिन बाद गिरफ्तार किया गया था। लेकिन जमानत मिलने के बाद वह छुपकर अमेरिका लौट गया। फिर कभी भारतीय कानूनों के शिकंजे में नहीं आया। उसे भगोड़ा घोषित किया गया। अमेरिका से प्रत्यर्पण के प्रयास भी हुए। लेकिन कोशिशें नाकाम रहीं। भोपाल गैस त्रासदी के सबसे बड़े आरोपी 92 वर्षीय एंडरसन की मौत 29 सितंबर को अमेरिका के फ्लोरिडा में गुमनामी में हो गई। यहां तक कि उसके परिवार को भी मौत की ख़बर नहीं दी गई। एक अस्पताल से मिले सरकारी रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि हुई थी।