एक रैली मछली के लिए ...

शुक्रवार को हिल्सा मछली के लिए एक रैली पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के औद्योगिक शहर हल्दिया में निकाली गई। जिसका आयोजन जिला मत्स्य विभाग ने किया था। शहर के वृजलाल चौक से निकाली गई इस रैली ने आस – पास के करीब 20 किलोमीटर की परिक्रमा की।

एक रैली मछली के लिए ...

अमितेश कुमार ओझा

राजनीतिक सभा व रैलियां आपने बहुत देखी – सुनी होंगी। लेकिन मछली बचाने के लिए क्या आप किसी रैली की उम्मीद कर सकते हैं, वह भी उस पश्चिम बंगाल में जहां मछली लोगों के भोजन का अहम हिस्सा है। जिसके बगैर जनमानस का भोजन पूरा ही नहीं हो सकता। वह भी उस हिल्सा मछली के लिए जिसके नाम से ही किसी बंगाली के मुंह में पानी आ जाता है। जो हिल्सा मछली 400 रुपए से 1500 रुपए किलो तक सहज ही बिक जाया करती है। लेकिन यह बात पूरी तरह से सच है।

शुक्रवार को ऐसी ही एक रैली पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के औद्योगिक शहर हल्दिया में निकाली गई। जिसका आयोजन जिला मत्स्य विभाग ने किया था। शहर के वृजलाल चौक से निकाली गई इस रैली ने आस – पास के करीब 20 किलोमीटर की परिक्रमा की। रैली में कई टैबलो, वाहन व बाइकें तो थी ही मछुआरों से लेकर स्कूली छात्र – छात्राएं व जिला मत्स्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल रहे। रैली का मुख्य उद्देश्य लोगों को छोटी हिल्सा मछली पकड़ने या खाने से रोकने का संदेश देना रहा।

जिला मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि समुद्र में पाई जाने वाली इस मछली का एक आकार बन जाने के बाद ही खाना उचित है। छोटी मछलियों को पकड़ कर खा लेने से समुद्र में इस प्रजाति की मछलियों का अभाव हो रहा है। यह पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो सकता है। यह सिलसिला जारी रहा तो संभव है एक दिन समुद्र से इस प्रजाति की मछलियां गायब ही हो जाए। इसलिए छोटी हिल्सा मछलियों को बचाना बेहद ही जरूरी है। क्योंकि मछलियों का जीवन चक्र  समुद्र में पर्यावरण संतुलन बनाए रखता है। यदि उन्हें समय से पहले ही पकड़ कर खा लिया गया तो हमें नई मछलियां कैसी मिल पाएंगी। इसलिए समाज के हर नागरिक को यह दायित्व निभाना होगा। जिससे लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया जा सके कि वे छोटी हिल्सा मछलियों को न पकड़ें। केवल व्यस्क मछलियां ही पकड़ी और खाई जाएं। यह हर किसी के लिए बेहतर होगा। इस अनोखी रैली की इलाके में खासी चर्चा रही।