ममता ने टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती को बताया 'तख्तापलट'

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममत बनर्जी ने टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती को बताया 'तख्तापलट', रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा, 'यह नियमित अभ्यास है'

ममता ने टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती को बताया

पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में टोल प्लाजा पर सैनिकों की मौजूदगी और इसके विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पूरी रात राज्य के सचिवालय में रूकने को लेकर शुक्रवार को बवाल खड़ा हो गया। ममता ने सवाल किया कि क्या यह ‘सैन्य तख्तापलट है’ जिस पर केंद्र ने पलटवार करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री की ‘राजनीतिक हताशा’ को दिखाता है।

ममता 24 घंटे से अधिक समय तक राज्य सचिवालय में रहने के बाद वहां से निकलीं और मोदी सरकार पर निशाना साधा।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने ममता के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यह नियमित अभ्यास था। पर्रिकर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सेना को ‘अनावश्यक विवाद’ में घसीटा जा रहा है। सेना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के इन आरोपों का मजबूती से खंडन किया है कि राज्य सरकार को सूचित किए बिना ही सैन्यकर्मियों को टोल प्लाजा पर तैनात किया गया था और वे पैसे वसूल रहे थे और कहा कि अभ्यास कोलकाता पुलिस के साथ समन्वय से किए जा रहे हैं। वैसे, सेना के जवान सचिवालय के निकट के टोल प्लाजा से गुरुवार रात हट गए थे।

मोदी सरकार पर संसद में गलत और गनगढ़ंत बयान देने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि साजिश रचकर और ताकत दिखाकर उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। ममता ने कहा कि अगर राज्य के सभी टोल प्लाजा से सेना को नहीं हटाया गया तो राज्य सरकार कानूनी कदम उठाएगी।

ममता ने राज्य सचिवालय नबान्न में कहा कि हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए मैं सचिवालय में ही रूकूंगी। क्या यह सैन्य तख्तापलट है। ममता ने आगे कहा कि मुर्शिदाबाद, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर 24 परगना, बर्धमान, हावड़ा और हुगली आदि जिलों में सेना के जवानों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि सेना को राज्य सरकार को सूचित किए बगैर तैनात किया गया है। यह अभूतपूर्व और बेहद गंभीर मामला है।

यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में भी उठा जहां मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के 19 टोल प्लाजा पर सेना तैनात किए जाने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा।

लोकसभा में रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों एवं पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में सेना की मौजूदगी नियमित अभ्यास का हिस्सा है और सेना के नियमित अभ्यास को लेकर इस प्रकार का विवाद खड़ा करना दुखद और गलत है। पर्रिकर ने आगे कहा, ‘सेना के नियमित अभ्यास पर विवाद पैदा करना वास्तविक स्थिति पेश करने की बजाए राजनीतिक हताशा का परिचायक है।’ पर्रिकर ने तृणमूल कांग्रेस के उस दावे को भी खारिज किया कि जिला प्रशासन को विश्वास में नहीं लिया गया था और कहा कि पश्चिम बंगाल में इस संबंध में कोलकाता पुलिस के आग्रह पर तारीखों में परिवर्तन किया गया।

पर्रिकर ने कहा कि इस अभ्यास की मूल तिथि 28 से 30 नवंबर थी लेकिन इसे कोलकाता पुलिस के आग्रह पर बदलकर 1-2 दिसंबर किया गया क्योंकि उन दिनों नोटबंदी के विरोध में भारत बंद का आहवान किया गया था। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अभ्यास पश्चिम बंगाल के लिए अलग नहीं है क्योंकि भारी वाहनों की गतिविधि के बारे में सूचना एकत्र करने के मकसद से पिछले महीने भी उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड में ऐसे अभ्यास हुए थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस बार भी पश्चिम बंगाल के अलावा, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम में ये अभ्यास किये गए।

तृणमूल नेताओं ने दोनों सदनों में आरोप लगाया कि टोल प्लाजा पर सेना की मौजूदगी के संदर्भ में न तो राज्य सरकार और न ही स्थानीय प्रशासन को विश्वास में लिया गया था। कांग्रेस और बसपा ने भी इस मुद्दे पर जानना चाहा कि राज्य सरकार को विश्वास में लिए बिना सैना की तैनाती कैसे की गई।

जीओसी बंगाल एरिया, मेजर जनरल सुनील यादव का कहना है कि यह स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय से किए जा रहे हैं। पहले 27 और 28 नवंबर को अभ्यास की योजना थी। 28 नवंबर को भारत बंद के आह्वान पर कोलकाता पुलिस के विशेष आग्रह पर तारीखें 30 नवंबर से दो दिसंबर बदली गईं। मुख्यमंत्री के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मेजर जनरल यादव ने कहा, ‘हम सभी आरोपों से इनकार करते हैं।’