नोटबंदी: माेदी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट नहीं रख पाई कांग्रेस, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आज

8 नवंबर से लागू हुए नोटबंदी पर सरकार को घेरने के लिए आज दोपहर कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ विपक्षी दलों की महत्वपूर्ण बैठक और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होना संभावित है। इस बार कांग्रेस सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने में नाकाम रही है और विपक्ष के बड़े नेताओं में सिर्फ ममता और लालू प्रसाद यादव के ही इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रहने की संभावना है।

नोटबंदी: माेदी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट नहीं रख पाई कांग्रेस, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आज

8 नवंबर से लागू हुए नोटबंदी पर सरकार को घेरने के लिए आज दोपहर कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ विपक्षी दलों की महत्वपूर्ण बैठक और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होना संभावित है। इस बैठक में शामिल होने के चलते बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को ही दिल्ली पहुंच गई हैं लेकिन इस बार कांग्रेस सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने में नाकाम रही है और विपक्ष के बड़े नेताओं में सिर्फ ममता और लालू प्रसाद यादव के ही इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रहने की संभावना है।

पीएम माेदी ने हालात सामान्य करने के लिए जनता से 50 दिन का समय मांगा था और वह पचास दिन अब पूरे होने वाले हैं। इसी सिलसिला काे मद्देनजर देखते हुए 27 दिसंबर यानी आज विपक्षी दलों ने एक जुट हाेकर आगे की रणनीति पर विचार करने का फैसला किया था, लेकिन इस बार विपक्ष में वैसी एकजुटता नहीं दिख रही। 16 विपक्षी दलों की मीटिंग से पहले ही इसमें फूट की खबरें आ गईं। वाम दलों के इसमें शामिल होने की संभावना नहीं है। सिर्फ वाम दल ही नहीं जेडीयू के भी इसमें शामिल होने की संभावना अब न के बराबर है। जेडीयू ने बैठक से पहले न्यूनतम साझा कार्यक्रम की मांग की। सीताराम येचुरी ने कहा कि वह कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों की मंगलवार को होने वाली संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं होंगे। सीताराम येचुरी ने कहा था कि सभी 16 विपक्षी दल बैठक में नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को बुलाया गया है तो असम, त्रिपुरा और अन्य विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्री क्यों नहीं ? योजना ठीक से नहीं बनाई गई है। इस तरह अभी कांग्रेस को सिर्फ टीएमसी, राजद और जेडीएस का ही साथ मिल पाया है। कांग्रेस को अब नोटबंदी के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।

जेडीयू के केसी त्यागी ने कहा था कि इस बैठक के पीछे की असली भावना के बारे में पता नहीं है। विपक्षी पार्टियों की मीटिंग के लिए कॉमन एजेंडा, जो कि होना चाहिए नहीं मिला है। ममता चाहतीं हैं कि फैसला वापस हो, लेकिन हम ऐसा नहीं चाहते। विपक्ष के कुछ ईर्ष्यालु नेताओं द्वारा नीतीश कुमार को गलत समझा गया। उन्होंने नोटबंदी का समर्थन किया था, मोदी या अन्य मुद्दों का नहीं।




दरअसल कांग्रेस ने बैठक में शामिल होने के लिए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जब बुलाया, तभी जेडीयू और वाम दलों ने साफ कर दिया कि वह इस बैठक में नजर नहीं आएंगे। कांग्रेस की ममता बनर्जी से बढ़ रही नजदीकियां वाम दलों को रास नहीं आ रही हैं, तो वहीं नीतीश कुमार को गद्दार कहने के लिए जेडीयू अभी तक ममता बनर्जी को माफ नहीं कर पाई है। बसपा और सपा का ध्यान सिर्फ चुनावों पर हैं तो कई अन्य दलों ने भी कुछ कांग्रेस नेताओं के नाम सहारा डायरीज में आने पर बैठक से कन्नी काट ली है। दूसरी तरफ कांग्रेस के बड़े नेता बैठक का बॉयकॉट करनेवाले विपक्षी दलों को मनाने में जुटे हैं। उनकी कोशिश है कि अगर विपक्ष के बड़े नेता खुद नहीं आते हैं तो वो कम से कम अपने प्रतिनिधि के तौर पर किसी नेता को बैठक में भेज दें ताकि नाेटबंदी पर विपक्ष की एकता का दावा किया जा सके।