दिल्ली: नोटबंदी को लेकर माकन ने सीएम केजरीवाल को लिखा पत्र

दिल्ली में नोटबंदी से परेशान प्रवासी मजदूर कर रहे पलायन, अजय माकन ने केजरीवाल से कहा- 'मजूदरों को बेरोजगारी भत्ता दें'

दिल्ली: नोटबंदी को लेकर माकन ने सीएम केजरीवाल को लिखा पत्र

दिल्ली कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन ने नोटबंदी से परेशान होकर पलायन कर रहे प्रवासी मजदूरों को रोकने के लिए केजरीवाल सरकार से बेरोजगारी भत्ता देने की मांग की है।

अजय माकन ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री केजरीवाल को पत्र भी लिखा गया है। नोटबंदी के कारण खुदरा बिक्री में 88.90 फीसद तक की कमी आई है। विभिन्न लद्यु उद्योग संगठनों से बातचीत के बाद पता चला है कि उत्पादन में 80 फीसद तक की कमी आई है जिसके नतीजतन नौकरियों में कमी आने के कारण बेरोजगारी बढ़ी है।

माकन ने कहा, 'नोटबंदी का सबसे भयावह प्रभाव दैनिक मजदूरों, तदर्थ कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के मजदूर वर्ग पर पड़ा है और उन्हें सबसे ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं जबकि इस वर्ग की जनसंख्या दिल्ली में सबसे ज्यादा है। रोजगार पर एनएसएसओ सर्वे 2011-2102 के बीच के 68वें राउंड का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली की कामगार जनसंख्या 57.06 लाख थी।'

माकन ने कहा कि रोजगार निदेशालय व दिल्ली सरकार का आंकड़ा यह दर्शाता है कि 2009 में संगठित क्षेत्र में कर्मचारियों की संख्या 8.43 लाख थी। यह संख्या पिछले दशक में समान रही है। दिल्ली में असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या 48.63 लाख है जो कुल कामगारों का 85.33 फीसद है। 48.63 लाख कर्मचारी जो असंगठित कामगार हैं, उनपर बेरोजगारी की तलवार लटक रही है।

अपने पत्र में माकन ने लिखा, 'उनकी चिंता मुख्य रूप से दो बिंदुओं को लेकर है। पहला, 48.63 लाख असंगठित-अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर की जो कि बाहर से आने वाले लोगों की पहली पीढ़ी की जनसंख्या हैं। दूसरा उलटा पलायन के शुरू होने की रिपोर्ट भी आ रही है।'

सूत्रों के मुताबिक, 'नोटबंदी के बाद पहले ही कई लाख मजदूर वापस जा चुके हैं और 10 से 15 हजार मजदूर रोजाना दिल्ली से पलायन कर रहे हैं। यह सबसे बड़ा खतरा है। क्योंकि इन असंगठित मजदूरों के कारण ही दिल्ली चल पा रही है। ये लोग दिल्ली की श्रमशक्ति की जीवनरेखा हैं।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा, 'आज दिल्ली में चलने वाली बड़ी परियोजनाओं में दिहाड़ी मजदूरों को दैनिक मजदूरी न मिलने के कारण काम रुक गया है। अगर असंगठित-अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले लोग वापस अपने गांव और शहरों को चले गए तो दिल्ली की हालत खराब हो जाएगी और दिल्ली को पटरी पर आने के लिए बहुत समय लगेगा।'

अजय माकन ने कहा, 'अरविंद केजरीवाल मेरी दूसरे मुद्दों पर सलाह माने या न मानें लेकिन इस विषय पर मेरी सलाह को मानें और तुरंत प्रभाव से कदम उठाए ताकि असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों का रिवर्स माइग्रेशन रुक सके।'