शाइनिंग इंडिया जैसा झटका तो नहीं देगा नोटबंदी ? नारदा स्पेशल

अगर बीजेपी आलाकमान नोटबंदी को लेकर भी वैसी ही उम्मीद कर रहे हैं जैसी कभी शाइनिंग इंडिया से पार्टी को रही थी, तो वो बिलकुल सही सोच रहे हैं।नोटबंदी बीजेपी को वैसा ही झटका दे सकती है। जैसा शाइनिंग इंडिया से मिला था। हांलांकि अभी वक्त है हालात संभाली जा सकती है।

शाइनिंग इंडिया जैसा झटका तो नहीं देगा नोटबंदी ? नारदा स्पेशल

नोटबंदी को बीजेपी विनिंग इनिंग मानकर चल रही है इसके पीछे बीजेपी तर्क दे रही है कि नोटबंदी के बाद पीएम की यूपी में हो रही रैलियों में उमड़ रही भीड़ और मिल रहे उनके समर्थन से साबित हो रहा है कि नोटंबदी का कदम सही है।

बैंकों और एटीएम से पैसा निकालने के लिए घंटों लाइन में लगने वाले लोगों में गुस्सा जरूर है, लेकिन ज्यादातर सरकार के कदम को सही और व्यवस्था को सीधे दोषी ठहरा रहे हैं। उनका गुस्सा बैंकों पर उतर रहा है। लोगों की इसी सोच से बीजेपी कुछ हद तक संतुष्ट है। बीजेपी का थिंक टैंक मानकर चल रहा है कि संचार क्रांति के युग में आमजन देश के हर मुद्दे से वाकिफ है। कालाधन, आतंकवाद, भ्रष्टाचार इसमें शामिल है। नोटबंदी इन पर प्रहार है, यह आम जनता समझ रही है। तभी संसद से लेकर सड़क तक विरोध करने वाले विपक्ष का साथ नहीं देकर वह पीएम की रैलियों में जाकर नोटबंदी का समर्थन कर रही है। लेकिन दूसरा पक्ष ये भी है कि बीजेपी नोटबंदी के बाद से उपजे हालात को लेकर भी चिंतित है। बीजेपी को ये नोटबंदी के बाद से चारोतरफ त्राहिमाम है कही जनता ने रिवर्स गियर लगा दिया तो नोटबंदी का हस्र भी शाइनिंग इंडिया की तरह हो जाएगा। नोटबंदी के मसले पर बुरी तरह घिर चुकी बीजेपी के लिए फिलहाल राहत की बात बस इतनी ही है कि विपक्ष में फूट पड़ चुकी है. जब राष्ट्रपति से मिलने सोनिया गांधी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल लेकर पहुंचीं तो विपक्ष के चार दलों के नेता नदारद थे. कहा जा रहा है कि ये विपक्षी राहुल गांधी के प्रधानमंत्री से अकेले अकेले मिल लेने से खफा हैं.

 समझो और समझाओ का फरमान

बीजेपी संसदीय दल की बैठक में मोदी ने नेताओं से अपेक्षा की कि पहले तो वे खुद नोटबंदी के फायदे समझ लें और फिर उसे लोगों को समझाएं - और डिजिटल पेमेंट को सफल बनाने के लिए पूरी कोशिश करें। नोटबंदी को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने तो सांसदों को पहले खुद उसका महत्व समझ लेने की सलाह दी है - उसके बाद लोगों को भी उसके बारे ठीक से समझाने की हिदायत दी है ताकि मोदी के मिशन को सफल बनाया जा सके। शाह ने सभी सांसदों को अपने इलाके में सात दिन बिताने को कहा है - और नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष की पोल खोलने का फरमान जारी किया है.

कैश और कैशलेस के भंवर में आम आदमी फंसा हुआ है।घंटों लाइन में गुजारने के बाद भी किसी को एटीएम से दो हजार भी नहीं मिल पा रहा है।बीजेपी के कई नेता महसूस करने लगे हैं कि नोटबंदी का फैसला बैकफायर करने लगा है. अगर बीजेपी ने डैमेज कंट्रोल का कोई फॉर्मूला जल्दी नहीं निकाला तो स्थिति और खराब हो सकती है - और फिर यूपी सहित और राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

अगर बीजेपी आलाकमान नोटबंदी को लेकर भी वैसी ही उम्मीद कर रहे हैं जैसी कभी शाइनिंग इंडिया से पार्टी को रही थी, तो वो बिलकुल सही सोच रहे हैं. नोटबंदी बीजेपी को वैसा ही झटका दे सकती है जैसा शाइनिंग इंडिया से मिला था। हांलांकि अभी वक्त है हालात संभाली जा सकती है।