राजनीतिक दलाें से भी हिसाब मांगा जाएगा, छूट नहीं दी जाएगी: जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक पार्टियाें को कर छूट पर संदेह की स्थिति को दूर करते हुए कहा कि वे 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोटों में चंदा स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पिछले महीने ही अवैध कर दिया गया था। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि कोई भी नई छूट नहीं दी गई है।

राजनीतिक दलाें से भी हिसाब मांगा जाएगा, छूट नहीं दी जाएगी: जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक पार्टियाें को कर छूट पर संदेह की स्थिति को दूर करते हुए बीते शनिवार को कहा कि वे 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोटों में चंदा स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पिछले महीने ही अवैध कर दिया गया था। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि कोई भी नई छूट नहीं दी गई है।

जेटली ने कहा कि पंजीकृत राजनीतिक दलों की आय पर ऐतिहासिक रूप से दी जाने वाली सशर्त कर छूट जारी है और आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद या पिछले ढाई वर्षों में कोई नई छूट या रियायत नहीं दी गई है।

उन्होंने यह बात मीडिया काे संबाेधित करते एक बयान में कहा, "नोटबंदी के बाद कोई राजनीतिक दल 500 या 1000 रुपये के नोटों में चंदा स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि उन्हें अवैध घोषित किया गया है। ऐसा करने वाला कोई भी दल कानून का उल्लंघन करेगा।"

अगर राजनीतिक दलों के खातों के ब्योरे उसके दावे से मेल नहीं खाते तो आयकर अधिकारी आम लोगों की तरह ही उनसे भी पूछताछ कर सकते हैं। राजनीतिक दलों को इस संबंध में बने कानून से कोई छूट नहीं है। वित्तमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि अगर सरकार का कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ न हो तो वे गुस्सा जाहिर कर सकते हैं। लेकिन मेरा कहना है कि वे सरकार के कदम पर तुरंत निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी रिसर्च कर लें।

आयकर संशोधन अधिनियम के बारे में उन्होंने कहा आज के तुरंत गुस्से के दौर में एनडीए सरकार ने 35 साल एक पुराने कानून को नए सिरे से संसद में पारित किया है। वित्तमंत्री ने कहा राजनीतिक दलों को दिया जाने वाला दान या चंदा आयकर अधिनियम 1961 की धारा 13 के तहत आता है। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से नरेंद्र मोदी के उदाहरण से सबक लेने की अपील है और कहा है कि वे भी अपने सांसदों और विधायकों को नोटबंदी के बाद अपने बैंक खातों का ब्योरा पेश करने को कहें।

जेटली ने कहा कि किसी भी अन्य की तरह राजनीतिक दल बैंकों को 30 दिसंबर तक पुराने नोटों में रखी गई नकदी जमा करा सकते है, "बशर्ते वे संतोषजनक रूप से आय के स्रोत का संतोषजनक उत्तर दें और उनकी खाता पुस्तिका आठ नवंबर से पहले की प्रविष्टियां दर्शाती हो।यदि राजनीतिक दलों की पुस्तिकाओं या रिकॉर्ड में कोई असंगति पाई जाती है तो आयकर अधिकारी अन्य लोगों की तरह उनसे भी पूछताछ कर सकते हैं। उन्हें कोई छूट नहीं है।"