नाेटबंदी के विरोध को लेकर विपक्षी दलों में नहीं एकजुटता

कॉन्‍फ्रेंस में सभी विपक्षी दलों कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, जेडीएस, जेएमएम, एआईयूडीएफ के सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया। जबकि बसपा, सपा, एनसीपी, सीपीआई, जेडीयू, सीपीएम जैसे प्रमुख विपक्षी दलों के प्रतिनिधि गायब रहे। जो कि साफ दर्शाता है कि मोदी के नोटबंदी के फैसले को लेकर अब विपक्षी दलों में फूट की स्थिती पैदा हो गई है।

नाेटबंदी के विरोध को लेकर विपक्षी दलों में नहीं एकजुटता

केंद्र में भाजपा की  माेदी सरकार पर नाेटबंदी काे लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में सभी विपक्षी दलाें ने आज नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन कल्ब में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन रखी गई, जिसमें कांग्रेस, डीएमके, राजद समेत कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजित प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी नहीं पहुंची। उनकी जगह राहुल गांधी ने नेतृत्व किया। हालांकि कॉन्‍फ्रेंस में सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, जेडीएस, जेएमएम, एआईयूडीएफ के सदस्‍यों ने हिस्‍सा लिया। जबकि बसपा, सपा, एनसीपी, सीपीआई, जेडीयू, सीपीएम जैसे प्रमुख विपक्षी दलों के प्रतिनिधि गायब रहे। जिससे साफ पता चलता है कि अब नोदी के नोटबंदी के फैसले के विरोध को लेकर विपक्षी दल एकजूट नहीं है।

बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि ’30 दिसंबर आने वाला है और हालात वहीं हैं।
नोटबंदी का उद्देश्‍य पूरी तरह फेल हो गया है। पीएम को देश को जवाब देना चाहिए कि नोटबंदी का असली मकसद क्‍या था और जो इससे प्रभावित हुए हैं, वह उनके लिए क्‍या करेंगे।’ सहारा के आरोपों से शीला दीक्षित के इनकार पर राहुल ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के खिलाफ नरेंद्र मोदीजी ने कोई कानून नहीं निकाला। हम उनको पूरा सपोर्ट देंगे। अगर लड़ाई लड़नी है तो पीएम क्‍यों पीछे रहें। वो खुद आगे आकर क्‍यों नहीं कहते कि मुझपर आरोप लगे हैं तो जांच कर लीजिए।

ममता ने कहा कि पीएम ने 50 दिन मांगे थे। क्या अब वो इस्तीफा देंगे ? देश में हालात ठीक नहीं हैं। इन चालीस दिनों में देश 20 साल पीछे चला गया है। जो काम आरबीआई को करना चाहिए था, वह भी आपने किया। आप किसी को खाने नहीं दे सकते और सब कुछ छीन लिया। बैंक में तो 6 हजार रुपया भी नहीं मिलता है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि कैशलेस के नाम पर मोदी सरकार बेसलेस हो गई है, टोटल फेसलेस हो गया है।

दरअसल कांग्रेस ने बैठक में शामिल होने के लिए सभी विपक्षी दलाें काे न्याैता दिया था। इस पर वाम दल ने इंकार कर दिया था आऐर साथ में जेडीयू ने भी साफ कर दिया कि वह इस बैठक में नजर नहीं आएंगे। वहीं बसपा और सपा का ध्यान सिर्फ चुनावों पर हैं तो कई अन्य दलों ने भी कुछ कांग्रेस नेताओं के नाम सहारा डायरीज में आने पर बैठक से कन्नी काट ली है। दूसरी तरफ कांग्रेस के बड़े नेता बैठक का बॉयकॉट करनेवाले विपक्षी दलों को मनाने में जुटे हैं। उनकी कोशिश है कि अगर विपक्ष के बड़े नेता खुद नहीं आते हैं तो वो कम से कम अपने प्रतिनिधि के तौर पर किसी नेता को बैठक में भेज दें ताकि नाेटबंदी पर विपक्ष की एकता का दावा किया जा सके।