पति ने दिया पत्नी को फोन पर तलाक, उलेमा ने दिया जायज़ करार

पत्नी को मोबाइल फोन पर तलाक के मामले में दिए गए दारुल उलूम के फतवे पर देवबंदी उलमा का कहना है कि मोबाइल पर दिया गया तलाक मान्य है...

पति ने दिया पत्नी को फोन पर तलाक, उलेमा ने दिया जायज़ करार

देश में तीन तलाक के मुद्दे को लेकर जहां देखो बहस छिड़ी हुई है कोई इसका समर्थन कर रहा है तो कोई विरोध ज्यादातर महिलाएं इसके विरोध हैं। जहां एक तरफ तीन तलाक देश के लिए अहम मुद्दा बना हुआ है वहीं पत्नी को मोबाइल फोन पर तलाक के मामले में दिए गए दारुल उलूम के फतवे पर देवबंदी उलमा का कहना है कि मोबाइल पर दिया गया तलाक मान्य है। उलमा का कहना है कि पत्नी की गैरमौजूदगी में खत, मोबाइल और ई-मेल के जरिए भी तलाक हो जाता है।

बता दें कि हरियाणा के पलवल जिले के मलाई गांव निवासी नसीम अहमद ने फोन पर पत्नी को तलाक दिया था। तलाक हुआ या नहीं, इस संबंध में दारुल उलूम से सवाल किया गया था। दारुल उलूम ने फतवा जारी कर तलाक को मान्य माना था। इस बाबत देवबंद के दीगर उलमा इकराम से राय जानी गई तो उनका कहना था कि तलाक के समय औरत की मौजूदगी जरूरी नहीं है। मोबाइल पर तलाक हो जाता है।

गौरतलब है कि दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि पति के तलाक कहने से पत्नी को तलाक हो जाता है। अगर शौहर ने फोन पर तलाक दिया तो भी तलाक हो जाएगा। पति ने तलाक दिया और पत्नी के अलावा कोई और आवाज सुनने वाला नहीं है तो फिर शौहर से तलाक देने की तस्दीक की जाएगी।

वहीं फतवा ऑन मोबाइल सर्विस के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि खत, मोबाइल और ई-मेल के जरिए भी तलाक हो जाता है। मोबाइल पर अगर तलाक देते समय पत्नी शौहर की आवाज नहीं पहचान पा रही है तो वह खुद या उसका कोई भी परिचित या रिश्तेदार तस्दीक करे। अगर शौहर तलाक की बात कुबूल करे तो तलाक हो जाएगा।