H1-B वीजा पर बाेले ट्रंप-विदेशी कामगारों को नौकरी की अनुमति नहीं देंगे

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H1-B वीजा को लेकर फिर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी के लोगों की रोजगार सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और वे अमेरिकी लोगों की जगह विदेशी कामगारों को नौकरी पर रखे जाने की अनुमति नहीं देंगे।

H1-B वीजा पर बाेले ट्रंप-विदेशी कामगारों को नौकरी की अनुमति नहीं देंगे

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H1-B वीजा को लेकर फिर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी के लोगों की रोजगार सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और वे अमेरिकी लोगों की जगह विदेशी कामगारों को नौकरी पर रखे जाने की अनुमति नहीं देंगे।

ट्रंप ने इस दौरान डिज्नी वर्ल्ड और दूसरी अमेरिकी कंपनियों का हवाला दिया जहां भारतीय कामगाराें समेत एच1-बी वीजा पर अमेरिका आए अन्य विदेशियों ने अमेरिकियों की नौकरियां छीन लीं। याद हो वीजा का मुद्दा ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान भी प्रमुखता से उठाया था और कहा था कि अमेरिकी लोगों का रोजगार वे किसी और देश के लोगों के लिए छिनने नहीं देंगे।

आयोवा में हजारों समर्थकाें के बीच ट्रंप ने कहा कि हर एक अमेरिकी की जिंदगी सुरक्षित करने के लिए वे लड़ेंगे। ट्रंप ने आगे कहा, 'कैंपेन के दौरान मैंने उन अमेरिकी कामगारों के साथ भी वक्त बिताया जिन्हें उन लोगों को प्रशिक्षण देना पड़ा था जिन्हें बाद में उन्हीं की जगह नौकरी पर रखा गया। उन्हें हटाने के लिए विदेशी कामगारों को लाया गया। हम अब ऐसा बिल्कुल नहीं होने देंगे।'




गौरतलब है कि डिज्नी वर्ल्ड और दो आउटसोर्सिंग कंपनियों पर इनके दो पूर्व तकनीकी कर्मचारियों ने संघीय कानून के तहत मुकदमा कर दिया है। शिकायत में कहा गया है कि इन कंपनियों ने अमेरिकी वर्करों को एच1-बी वीजाधारी सस्ते विदेशी मजदूरों जिनमें ज्यादातर भारतीय हैं, से स्थानांतरित करने के लिए साजिश रची।

ट्रंप ने कहा, ‘क्या आप यकीन कर सकते हैं? आपको नौकरी से निकाल दिया जाता है और आपको बकाया वेतन तब तक नहीं दिया जाता, जब तक आप उन लोगों को प्रशिक्षित नहीं कर देते जिन्हें आपकी जगह नौकरी पर रखा गया है। मेरा मतलब है, इससे ज्यादा अपमानजनक कुछ और नहीं हो सकता।’

ट्रंप ने वैसे तो चुनाव कैंपेन के दौरान कहा था कि ऐपल को अपने प्रोडक्ट्स अमेरिका में ही बनाने को कहा जाएगा। अब ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी कंपनियां अगर दूसरे देशों में प्लांट्स लगा कर प्रोडक्ट्स को अमेरिका में बेचेंगी तो उन्हें 35 फीसदी से ज्यादा टैक्स देने होंगे। ट्रंप ने एक साथ कई ट्वीट किए हैं जिसमें ऐसी कंपनियों के लिए सख्त बाते की हैं।

इससे अमेरिकी कंपनियों खासकर टेक्नॉलोजी जगत पर इसका खासा असर पड़ेगा और जाहिर है इससे मेक इन इंडिया पर भी असर पड़ेगा। क्योंकि कई अमेरिकी टेक कंपनियां मेक इन इंडिया के तहत भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाने के लिए तैयार हैं, और कई कंपनियों की नजर भी भारतीय बाजार पर है। पीएम मोदी की मेक इन इंडिया में दिए जाने वाले सहूलियतों की वजह से कई अमेरिकी भारत में अपनी फैक्ट्रियां खोलनी की तैयारी में थीं। लेकिन अब ट्रंप के इस मिजाज से संभव है कि वो इसे ठंडे बस्ते में डाल देंगी।

भारत इनफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी और सॉफ्टवेयर के मामले में काफी आगे है और तेजी से बढ़ रहा है। कई अमेरिकी कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए भारतीय फर्म पर निर्भर हैं। अगर डोनल्ड ट्रंप अपनी 35 फीसदी टैक्स बढ़ाने वाली पॉलिसी लाते हैं तो इससे भारत के सॉफ्टवेयर सर्विस एक्सपोर्ट सेक्टर को नुकसान होने की उम्मीद हैं जो लगभग 89 बिलियन डॉलर का है। यां के सॉफ्टवेयर सबसे ज्यादा अमेरिका और कनाडा में एक्सपोर्ट किए जाते हैं।