'मिस्त्री के कारण समूह कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान'

टाटा संस ने कहा कि मिस्त्री के कारण समूह कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा ।

टाटा संस ने साइरस मिस्त्री के उन आरोपों का आज जोरदार खंडन किया कि कंपनी का प्रबंधन करने वाले ट्रस्टों के संचालन में कमियां हैं।

पूर्व चेयरमैन मिस्त्री पर पलटवार करते हुए कंपनी ने कहा है कि टाटा समूह के ट्रस्टों का संचालन जमशेदजी टाटा व उनके दो बेटों की व्यक्तिगत वसीयतों से होता है। इसके साथ ही कंपनी ने मिस्त्री पर कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है।

टाटा संस 100 अरब डॉलर के टाटा समूह की अंशधारक कंपनी है जिसके चेयरमैन पद से मिस्त्री को पिछले महीने हटा दिया गया था। टाटा संस ने बयान जारी कर कहा कि मिस्त्री के बयानों से इस औद्योगिक घराने व उनकी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है और ‘सभी शेयरधारकों को हजारों करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।’ जिन कंपनियों को नुकसान हुआ है उनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जिनके चेयरमैन मिस्त्री अभी बने हुए हैं।

टाटा संस ने एक बयान में कहा कि ट्रस्टों का संचालन जमशेदजी टाटा, उनके बेटे सर दोराबजी टाटा व रतन टाटा और अन्य संस्थापकों की निजी वसीयतों से होता है। ये ट्रस्ट इन वसीयतों में तय उद्देश्यों का पालन कर रहे हैं।’ यही कारण है कि विभिन्न ट्रस्ट दशकों से काम कर रहे हैं। इनमें से अनेक ट्रस्टों में रतन टाटा आजीवन चेयरमैन हैं। इन ट्रस्टों की टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

इससे पहले टाटा संस और रतन टाटा के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज करते हुए साइरस मिस्त्री ने 6 नवंबर को कहा कि टाटा समूह किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं है और इसका भविष्य टाटा घराने के ट्रस्टों के संचालन पर निर्भर करता है। उन्होंने इन ट्रस्टों के संचालन में कथित कमियों का आरोप लगाते हुए सरकार से अपील की है कि वह इन ट्रस्टों की संचालन व्यवस्था में आई गड़बड़ियों का उपचार कर उन्हें ठीक करे।