संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार का EXCLUSIVE इंटरव्यू

देश का मुसलमान अब आरएसएस के विचारों के साथ खड़ा दिख रहा है। अभी तक आरएसएस का डर दिखाकर मुसलमानों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। अब ये बात मुस्लिम समाज समझ चुका है।

संघ प्रचारक इंद्रेश कुमार का EXCLUSIVE इंटरव्यू

पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने नोटबंदी का फैसला कुछ खास मकसद के लिए किया है,जो कि राष्ट्रहित में जरुरी है। करेंसी पर नियंत्रण से बंदूकी हिंसा पर लगाम लगी है। देश का मुसलमान अब आरएसएस के विचारों के साथ खड़ा दिख रहा है। अभी तक आरएसएस का डर दिखाकर मुसलमानों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये सारी बातें राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और संघ समर्थित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने नारदा न्यूज से बातचीत में कही । उन्होंने यूपी चुनाव से पहले बीजेपी और संघ की तैयारियों पर भी खुल कर बात की। पेश है इंद्रेश कुमार और नारदा न्यूज के पॉलिटिकल एडिटर विकास राज तिवारी के बीच बातचीत के मुख्य अंश...

नोटबंदी के बाद से पूरा देश परेशान है, नोटबंदी पर सरकार और विपक्ष के बीच संग्राम जारी है। इस पूरे मामले पर आपकी राय क्या है?

भारत सरकार ने नोटबंदी का फैसला कुछ खास मकसदों को ध्यान में रखकर किया है, जो राष्ट्रहित में जरुरी है। आजादी के बाद से देश में आतंकवाद, माओवाद, नक्सलवाद और अलगाववाद अपना पांव पसारते जा रहे थे। इन सारी हिंसा के कारोबार में करेंसी का अहम रोल होता है। नोटबंदी ने इन पर चोट किया है। करेंसी पर नियंत्रण करने से मजहबी हिंसा और अपराध पर भी रोक लगी है। वहीं देश में जो करप्शन का खेल चल रहा था नोटबंदी ने उस धंधे को भी बंद कर दिया है। इसका इफेक्ट भी देखा जा रहा है कि नोटबंदी को एक महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है आंतकी घटनाओं पर लगाम लगी है। अब कश्मीर में पत्थर फेंकने वाला कोई नहीं दिख रहा है। स्कूल भी चलने लगे हैं। जातीय और मजहबी दंगों पर भी लगाम लगी है। नोटबंदी के एक महीने बाद एक सर्वे पूरे देश में कराया गया था जिसमें 92 फीसदी लोगों ने नोटबंदी के फैसले को सही करार दिया था।

नोटबंदी की वजह से पूरा देश कतार में दिखा वहीं कई जगह छापे मारे गए तो लोगों के पास भारी मात्रा में नए नोट मिले। आखिर सरकार ने कैसी तैयारी की थी ?



नोटबंदी के बाद से सरकार ने देश में करेंसी के बेहतर फ्लो की पूरी तैयारी कर रखी थी। लेकिन कई छापों के बाद से एक चीज सामने आई कि कुछ लोग हिंदुस्तान को बदलने देना ही नहीं चाहते है। कुछ भी अच्छा काम हो रहा है फिर भी वो अपनी आदत से बाज नहीं आए। उनका काम लूटना है और वो लूटना नहीं छोड़ेंगे। नोटबंदी के बाद ज्वैलर्स ने खूब पैसे बनाएं। इन सब चीजों पर समाज को भी विचार करना होगा और अपनी पैनी नजर रखनी पड़ेगी। नोटबंदी ने तो हसबैंड-वाइफ ने जो एक दूसरे से पैसे चुरा कर रखे थे वो सामने ला दिया है। इससे समाज में पारदर्शिता आई है। मैं नारदा न्यूज के माध्यम से समाज के लोगों से अपने बच्चे से लेकर बूढ़े तक सबका बैंक अकाउंट खुलवाने की अपील करता हूं। जिसके पास भी एकस्ट्रा मनी है वो उसका टैक्स भरें। देश के विकास में भागीदार बनें।

यूपी चुनाव 2017 से पहले मुस्लिमों को बीजेपी के करीब लाने के लिए आरएसएस के पास कौन सा मंत्र है?

केंद्र की मौजूदा सरकार सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ काम कर रही है। उत्तरप्रदेश हो या देश हो जब सभी घर्मो के लोग मुख्यधारा में एक साथ विकास करे और एक साथ बिना किसी तनाव के रहे तो उसी के अंदर मुसलमान का भी विकास होगा। मुसलमानों को अल्पसंख्यक बनाकर ठगा गया है आज मुसलमान उससे बहुत परेशान हैं। इसलिए लाखों मुसलमानों की राय जानने के बाद ये सामने आया है कि समाज को मजहबों और जातीयों में बांटने से देश का नुकसान हुआ है। अब देश को मजहबों में ना बांटा जाय सबका विकास हो सबके लिए समान अवसर हो। मजहब के नाम पर भेदभाव ना हो। आज देश का मुसलमान सच्चाई जान गया है देश के कुछ दल जैसे कांग्रेस, सपा, बसपा राजद और जदयू जैसी पार्टियों मुसलमानों को संघ से नफरत करना सिखाया और उनका इस्तेमाल किया लेकिन अब मुसलमान सबकुछ समझ गया है। अब देश का मुसलमान संघ के कार्यों से प्रभावित है और संघ से बात भी कर रहा हैं। मुसलमान ये समझ चुका है कि बीजेपी और आरएसएस के नाम पर डराकर कुछ दलों ने उनका वोट लिया है उनको दिया कुछ भी नहीं। लालू, मुलायम, आजम, ओवैसी, मायावती और नीतीश जैसे लोग समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ही एक ऐसी संस्था है जो देश में हिंदू- मुस्लिम को एक साथ लाने का काम कर रही है।

बिहार चुनावों से पहले संघ प्रमुख ने आरक्षण पर रिव्यू की बात कही थी, बीजेपी के बड़े नेता सीपी ठाकुर ने नारदा न्यूज से बातचीत में आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत की है। आपका क्या मानना है ?



आरक्षण के रिव्यू की बात मोहन भागवत जी ने नहीं कहीं थी उनके बयान को गलत समझा गया था। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था बनी रहनी चाहिए, हां इस बात पर बल देने की जरुरत है कि आरक्षण का लाभ हर जरुरतमंद को मिले। आरक्षण कैटेगरी में आने वाले हर व्यक्ति तक लाभ पहुंचे, आम तौर पर देखा जा रहा है कि जरुरतमंद ही आरक्षण के लाभ से महरूम रह जा रहा है। ऐसे में सभी दलों और सरकार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए जरुरतमंद तक आरक्षण का लाभ पहुंच सके। दूसरी बात आर्थिक आधार पर पिछड़े लोगों के लिए अगर कोई व्यवस्था मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को बिना डिस्टर्ब किए बन सकती है तो उस पर भी विचार करना चाहिए।



तीन तलाक के मुद्दे पर देश बंटा हुआ है, कई मुस्लिम स्कॉलर इसके पक्ष में है तो कुछ ने मुखालफत भी की है। क्या कहेंगे आप ?

कुरान शरीफ और हदीस के अनुसार तलाक खुदा को नापसंद है। निकाह खुदा के घर में तय होते है और धरती पर सजाए और नवाजे जाते हैं। तलाक एक गुनाह है इसे नहीं करना चाहिए। मुस्लिम विद्वानों ने भी तलाक का विरोध किया है। ट्रिपल तलाक की इजाजत ना कुरान शरीफ देता है ना ही हदीस ने इसे सही माना हैं। ट्रिपल तलाक गैर इस्लामिक है, गैर कानूनी है और अमानवीय भी है। मुस्लिम महिलाओं की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और केरल हाईकोर्ट ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया है और इसे महिलाओं पर अत्याचार माना है। हिंदुस्तान में मजहबी अदालतों का चलन नहीं चल सकता।

संघ की तरफ से हमेशा गौरक्षा की बात होती रही है लेकिन बीजेपी की सरकार में बूचड़खानों की संख्या में इजाफा हुआ है। हरियाणा में बिरयानी में बीफ की बात सामने आई थी। आपका क्या मानना है ?



गाय मानव के सुरक्षा और विकास का रास्ता है, जन कल्याण का मार्ग है। गाय की कुर्बानी इस्लाम में भी नाजायज मानी गई है। मैं हर जाति और हर धर्म के लोगों से अपील करूंगा की वो गाय की हिफाजत करे। गाय आर्थिक विकास का बहुत बड़ा संशाधन है दूध से खाद्यान्न मिलता है मूत्र से दवाईयां बनती है और आम आदमी का सीमेंट ही गाय का गोबर है। बीजेपी की ढ़ाई साल के कार्यकाल के दौरान गाय की कुर्बानी में कमी आई है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की तरफ से ये आरोप लगाए जा रहे है कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सीमा पर घुसपैठ बढ़ी है। सैनिकों के शहादतें ज्यादा हो रही हैं। आप इसको किस तरह से देखते हैं ?

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से भारत सरकार ने सेना को छूट दे रखी है। हमारे यहां जितनी शहादतें होती हैं उससे ज्यादा पाकिस्तान में मौतें होती हैं। कुछ राजनेता जो भारत सरकार के किए काम का क्रेडिट नहीं देना चाहते हैं वो परेशान है। भारत ने अपनी नीति साफ कर दी है कि हम दुश्मन की भूमि पर लड़ाई लड़ेंगे। पाकिस्तान में पहले ही सिंधी, मोहाजिर, पखतुनी, बलूच, मुज़फ्फराबादी, बाल्तिस्तानी और गिल्गीथ आजादी मांग रहे है। जनमत संग्रह अब कश्मीर में नहीं पाकिस्तान में होगा।

जाकिर नाईक और दूसरे लोग जो साम्प्रदायिक उन्माद बढ़ाने के काम कर रहे हैं, उनपर लगाम के लिए सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए ?

हिन्दुस्तान के और दुनिया के अधिकांश मुस्लिम मजहबों ने जाकिर नाईक का विरोध किया है। वो इस्लाम का शैतान रूप प्रकट कर रहा है, इस्लाम का इंसानियत वाला रूप प्रकट नहीं कर रहा है और इसीलिए अधिकांश ने इस पर बैन की मांग की। वो नौजवानों को बरगला कर पैसों की उगाही कर रहा है और नौजवानों के भविष्य को बर्बाद कर रहा है।

समझौता ब्लास्ट को लेकर आप पर जो आरोप लगे, आप क्या कहेंगे।

सारे आरोप निराधार थे। आज सच देश के सामने है।