IIT बांबे: हनुमान की पेंटिंग पर विवाद, शिवसेना के विरोध के चलते हटी

आईआईटी-मुंबई के सांस्‍कृतिक कार्यक्रम में हनुमान की एक दीवार पेंटिंग पर विवाद उत्‍पन्‍न हो गया। शिवसेना ने इस मूर्ति को दिए गए रूप पर आपत्ति जताई और कार्यक्रम के आयोजकों से माफी मांगने को कहा।

IIT बांबे: हनुमान की पेंटिंग पर विवाद, शिवसेना के विरोध के चलते हटी

आईआईटी-मुंबई के सांस्‍कृतिक कार्यक्रम में हनुमान की एक दीवार पेंटिंग पर विवाद उत्‍पन्‍न हो गया। यह घटना उस वक्‍त घटी जब 24-26 दिसंबर तक आयोजित वार्षिक सांस्‍कृतिक महोत्‍सव मूड इंडिगो का आयोजन हो रहा था। वास्‍तव में हनुमान के एक हाथ में दुनागिरी पर्वत और दूसरे हाथ में गदा वाले एक प्रसिद्ध चित्र में रचनात्‍मकता दिखाते हुए इसमें छेड़छाड़ की गई।

इसके तहत गदा की जगह का स्‍थान फाउंटेन पेन ने ले लिया। सिर पर मुकुट की जगह हेडफोन लगा था और एक बांह पर आईपैड लगा था।उनकी पूंछ की जगह का स्‍थान एक लोकल ट्रेन ने लिय। पेंटिंग में उनको कलाई पर कई किस्‍म के बैंड और घडि़यां पहने और आंखों पर सनग्‍लास लगाए दिखाया गया। उनकी वेशभूषा भी अलग किस्‍म की थी। कपड़ों में हाफ शर्ट, शॉर्ट्स और टाई पहने दिखाया गया। एक पैर में फीतादार जूता और दूसरे में चप्‍पल पहने दिखाया गया।

जानकारी के मुताबिक, पेंटिंग यहां के सालाना सांस्‍कृतिक कार्यक्रम 'मूड इंडिगो' के तहत तैयार की गई थी। शिवसेना ने इस मूर्ति को दिए गए रूप पर आपत्ति जताई और कार्यक्रम के आयोजकों से माफी मांगने को कहा। बताया गया कि सोमवार को शिवसेना के कुछ कार्यकर्ताओं ने कैंपस में आकर विरोध प्रदर्शन भी किया। विरोध के बाद पेंटिंग को हटवा दिया गया। इस पेंटिंग में हनुमान को एक हाथ से पहाड़ और दूसरे हाथ में पेन लेकर जाते हुए दिखाया गया था। शिवसेना नेता दत्‍ता दलवी ने बताया, 'पेंटिंग गलत संदेश दे रही थी। इससे कई लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। हनुमान जैसे हिंदू देवता को दिखाने का यह सही तरीका नहीं है। छात्रों को देवताओं को इस तरह पेश नहीं करना चाहिए।

शिवसेना के स्‍थानीय नेताओं को जब इसका पता चला तो सोमवार को तमाम शिवसैनिक कैंपस में घुस आए और पेंटिंग को हटाने की मांग करने लगे। उनका कहना था कि यह चित्र गलत संदेश दे रहा है। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और हनुमान जैसे हिंदू देवता को दिखाने का यह तरीका बिल्‍कुल उचित नहीं है। इस तरह का चित्र किसी की धार्मिक भावनाओं का मखौल उड़ाने जैसा है। उसके बाद पहले तो उस पेंटिंग को कपड़े से ढंक दिया गया लेकिन बाद में उस पर सफेद कलर की पुताई कर दी गई।