अल्प विकसित देशों में कैंसर के 50 फीसदी मामले

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ कोलैबोरेशन के सर्वे के मुताबिक कम विकसित देशों में कैंसर के 50 फीसदी मामले है...

अल्प विकसित देशों में कैंसर के 50 फीसदी मामले

वैश्विक स्तर पर साल 2005 से 2015 के बीच कैंसर के मामलों में 33 फीसद की वृद्धि हुई है। जबकि कम विकास वाले देशों में इसी अवधी के दौरान इसमें 50 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। बता दें,  यह ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ कोलैबोरेशन के सर्वे में सामने आया है। यही नहीं इस उच्च विकास वाले देशों में कैंसर के 44 फीसदी नए मामले भी सामने आए हैं।

जानकारी के मुताबिक 2015 में दुनिया भर में कैंसर के नए मामले 1.75 करोड़ रहे और 87 लाख लोगों की इससे मृत्यु हुई। शोधकर्ताओं ने कहा कि हालांकि कैंसर दुनिया में दिल के रोगों के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। लेकिन इस घातक बीमारी के विकसित होने और इससे मरने की वज़ह बिल्कुल अलग दिखाई देती है। यह इस बात पर निर्भर करती है कि आप कहां रहते हैं। अमेरिका के वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और प्रमुख लेखक क्रिस्टीना फिटमउरिस ने कहा कि “कैंसर का प्रसार वास्तव में तेजी से हो रहा है”।

शोधकर्ताओं ने पाया कि कैंसर के सभी प्रकारों में सबसे सामान्य प्रकार के कैंसर स्तन, श्वास नली, ब्रांकस और फेफड़े (टीबीएल) हैं। इसकी वज़ह से 12 लाख लोग की दुनिया भर में मौत होती है। इसके बाद बड़ी आंत, मलाशय कैंसर और पेट और जिगर के कैंसर आते हैं। अध्ययन में पाया गया कि स्तन कैंसर से 523,000 मौतें 2015 में हुई। यह महिलाओं में होने वाला सामान्य कैंसर है।
अध्ययन के लेखकों का सुझाव है कि सरकारी एजेंसियों और निजी क्षेत्रों को रोकथाम के प्रयासों को बढ़ाने की ज़रूरत है। इसे खासतौर पर निचले एसडीआई वाले देशों में किया जाना चाहिए, जहां गर्भाशय ग्रीवा और जिगर कैंसर से ज़्यादातर घातक मौतों की सूची में हैं।