दिलीप कुमार B'day, जानिए उनकी ऐसी फिल्में जो बनी तो, पर दर्शक देख नहीं पाए

बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार की कुछ ऐसी फिल्में भी है जो बनी तो सही पर दर्शकों तक नहीं पहुंच पाई और बीच में ही रूक गई...

दिलीप कुमार B

बॉलीवुड में ज्यादातर कलाकार की कोई न कोई फिल्म ऐसी होती है जो बनती तो हैं पर रिलिज नहीं होती और बॉलीवुड के इस सच से दिलीप कुमार भी दूर नहीं रह पाए। दिलीप कुमार की उन फिल्मों का भी अपना ही एक अलग अंदाज़ है जो बनी तो हैं पर रिलीज़ नहीं हुई। दिलीप कुमार की कुछ फिल्में तो ऐसी हैं जो अगर रिलीज़ होती तो शायद हिंदी बॉलीवुड का इतिहास ही बदल जाता।

बता दें कि फिल्म ‘कलिंगा’ भी एक ऐसा ही उदाहरण है। दिलीप कुमार साहब ने खुद इस फिल्म का डायरेक्शन किया था। इस फिल्म के लिए 20 अप्रैल 1991 को मुहूर्त वाली रात दिलीप साहब ने जुहू के एक होटल जोरदार पार्टी रखी। सुधाकर बोकाड़े उस टाइम बहुत ही बड़े फिल्म मेकर थे और फिल्म में दिलीप कुमार का पहली बार डायरेक्शन था। पार्टी में दिलीप कुमार ने लगभग सभी फिल्म जगल के बड़े नामों को बुलाया था। फिल्म में दिलीप कुमार के साथ सनी देओल, मीनाक्षी शेषाद्री, राज किरण, शिल्पा शिरोडकर कलाकार थे। सायरा बानो भी फिल्म को लेकर काफी खुश थीं। दिलीप साहब ने फिल्म का संगीत नौशाद के हाथों बनवाया था। फिल्म की काफी चर्चा रही मगर 90% फिल्म बनने में तीन साल लग गए। फिल्म का पूरा होना मानो मजाक बन गया और फिल्म कभी रिलीज नहीं हो सकी।

वहीं फिल्म  ‘चाणक्य और चंद्रगुप्त’ भी कुछ ऐसी ही फिल्म है जिसकों देखकर दर्शक दिलीप कुमार के और ज्यादा करीब आ जाते इस फिल्म के लिए दिलीप साहब ने अपने पूरे बाल कटवा लिए थे। यहां तक की फोटो सेशन कराकर उनके फोटो भी छप गए थे लेकिन ये फिल्म अपने लास्ट रूप आती उससे पहले ही बंद हो गई और फिर कभी नहीं बन सकी।एस. व्ही. राजेंद्र सिंह के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘आग का दरिया’ तो पूरी भी हुई और उसकी पब्लिसिटी भी शुरु हुई। फिल्म में दिलीप साहब के साथ रेखा और पदमिनी कोल्हापुरे भी लीड रोल में थीं। मगर यह फिल्म भी रिलीज न हो सकी।

गौरतलब है कि दिलीप साहब की ही एक फिल्म ‘रास्ता’। जिसका मुहूर्त मेहबूब स्टूडिओ में निकला और जुहू एक होटल में शानदार पार्टी हुई। बाप्पया इस फिल्म के निर्देशक थे। मेहबूब स्टूडिओ के हॉल में ग्लैमरस सेट के ऊपर दिलीप कुमार और अनुपम खेर का एक लंबा सा चित्र लगाया गया था। इस फिल्म के तो मुहूर्त दृश्य के लिए भी दिलीप कुमार ने काफी रिहर्सल की थी जबकि फिल्म का मुहूर्त दृश्य फिल्म में नहीं रखा जाता। फिल्म में जीतेंद्र और श्रीदेवी की भी भूमिका थी मगर ये फिल्म मुहूर्त में ही बंद पड़ गई।

साथ ही डॉ जब्बार पटेल भी दिलीप कुमार को लेकर ‘ओ बाबाजान’ नाम की फिल्म बनाने जा रहे थे। उस फिल्म का कॉन्सेप्ट खुद दिलीप साहब का था पटकथा के ऊपर काफी काम हुआ मगर ये फिल्म भी बंद पड़ गई। साठ के दशक में फिल्म मेकर और डायरेक्टर नरेश सैगल ने दिलीप कुमार और नूतन को लेकर ‘शिकवा’ फिल्म की शूटिंग शुरु की थी। कुछ रील शूटिंग के बाद ये फिल्म भी आगे ना बन सकी। नासिर हुसैन ने फिल्म ‘जबरदस्त’ के लिए पहले दिलीप कुमार का ही नाम फाइनल किया था मगर किसी कारण यह बात रह गई और संजीव कुमार को वो भूमिका दी गई।