भारत ने शुरू की सिंधु नदी का जल रोकने की कवायद

भारत एक बार फिर पाकिस्तान को झटका देने की तैयारी में है। भारत अब सिंधु नदी जल समझौता (आईडब्ल्यूटी) का पाकिस्तान द्वारा नाजायज फायदा उठाने की हरकतों को रोकने के लिए काम कर रहा है।

भारत ने शुरू की सिंधु नदी का जल रोकने की कवायद

भारत एक बार फिर पाकिस्तान को झटका देने की तैयारी में है। भारत अब सिंधु नदी जल समझौता (आईडब्ल्यूटी) का पाकिस्तान द्वारा नाजायज फायदा उठाने की हरकतों को रोकने के लिए काम कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 23 दिसंबर 2016 को पीएम के प्रमुख सचिव निपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में इसी मुद्दे पर एक जरूरी बैठक की गई थी। वहीं बैठक में जम्मू-कश्मीर के हाइड्रो पावर प्रॉजेक्ट्स के काम में तेजी लाने पर चर्चा की गई। इसके सा थ ही समझौते के तहत पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित घाटी की पश्चिमी क्षेत्र की तीन नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी को स्टोर करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी बातचीत की गई।

मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक इस कार्य मे पंजाब की भूमिका अहम मानी जा रही है क्योंकि सिंधु घाटी की तीन और महत्वपूर्ण नदियां रावी, सतलुज और व्यास पंजाब में बेहती हैं। भारत इस समझौते का अपने पक्ष में बेहतर तरीके लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। इस मीटिंग का मकसद दोनों राज्य (जम्मू-कश्मीर और पंजाब) में चल रहे नदी से जुड़े प्रॉजेक्ट्स के काम में तेजी लाने का था, जिससे की सिंधु नदी समझौते का भारत ज्यादा से ज्यादा लाभ उठा सके।

वहीं सिंधु जल समझौता (1960) पर दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत दोनों देश सिंधु घाटी की 6 नदियां का इस्तेमाल करते हैं। बता दें कि समझौते के तहत पश्चिमी क्षेत्र की नदियों पर पाकिस्तान का नियंत्रण है, लेकिन भारत को भी इनके पानी का अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल करने का अधिकार है। भारत ने अभी तक इन नदियों के पानी को स्टोर करने और समझौते के तहत अपने कोटे के हिसाब से उसके पानी का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया है।