कैश की कमी काे दूर नहीं किया ताे मुश्किल बढ़ सकती है: जमशेद गोदरेज

भारत की सबसे बड़ी कन्ज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों में शामिल गोदरेज एंड बॉयस के चेयरमैन जमशेद गोदरेज का कहना है कि सरकार को दिसंबर में कैश की कमी पूरी तरह दूर कर लेनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो सभी के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

कैश की कमी काे दूर नहीं किया ताे मुश्किल बढ़ सकती है: जमशेद गोदरेज

भारत की सबसे बड़ी कन्ज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों में शामिल गोदरेज एंड बॉयस के चेयरमैन जमशेद गोदरेज का कहना है कि सरकार को दिसंबर में कैश की कमी पूरी तरह दूर कर लेनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो सभी के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। उन्होंने कहा कि नाेटबंदी से रिटेल, डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रेड पर निर्भर रहने वाले कारोबारों पर काफी असर हुआ है। गोदरेज ने आगे कहा कि जब बिजनस में कैश के इस्तेमाल की बात होती है तो इसका मतलब हमेशा ब्लैक मनी से जुड़ा कैश नहीं होता, यह लीगल कैश भी हो सकता है।

उन्होंने बताया कि अचानक 86 पर्सेंट कैश वापस लेने से खासतौर पर होलसेलर और रिटेलरों की मुश्किलें बढ़ी हैं। अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजनस पर कहीं ज्यादा बुरा असर पड़ा है। गोदरेज मानते हैं कि अगर कैश की कमी को इस महीने तक दूर नहीं किया जाता तो सबकी परेशानी बढ़ेगी। उन्होंने अपनी बात जाेड़ते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट्स की ओर एक झटके में शिफ्ट नहीं हुआ जा सकता क्योंकि लोगों को यह समझने में समय लगेगा कि वे करेंसी की जगह प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

जॉब क्रिएशन पर गोदरेज का कहना था कि गुड्स और सर्विसेज की डिमांड होने पर ही रोजगार बढ़ेंगे। देश का जीडीपी बढ़ने और गुड्स और सर्विसेज की डिमांड में वृद्धि के बाद ही नई नौकरियां बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने इस संबंध में चीन और साउथईस्ट एशिया का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में इकनॉमी का बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट बेस्ड है। इस वजह से वहां नौकरियों के अधिक अवसर हैं। गोदरेज ने बताया कि दक्षिण कोरिया जैसे छोटे देश में डोमेस्टिक कंजम्पशन कम है, लेकिन वह एक्सपोर्ट पर फोकस करता है और दुनिया भर में अपने प्रॉडक्ट्स बेचता है।



उन्होंने कहा कि भारत को ग्लोबल ट्रेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत है। गोदरेज ने कहा कि नाेटबंदी से स्लोडाउन हुआ है, लेकिन इसके बारे में पक्का बताना मुश्किल है। इस क्वॉर्टर में करंसी की उपलब्धता की समस्या का असर पड़ा है और अगले क्वॉर्टर में जीएसटी के लागू होने से असर पड़ेगा। टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच विवाद पर उन्होंने कहा कि वे सभी उनके दोस्त हैं। अगर वे अपने मतभेदों को पब्लिक और मीडिया की नजर में आए बिना सुलझा लेते तो बेहतर होता।




(फाेटाे सभार गूगल)